16 अप्रैल 2026

भोपाल:
मध्य प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए परिसीमन (क्षेत्र निर्धारण) और ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के बाद प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा, दोनों की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी। इसका सबसे बड़ा फायदा महिलाओं को मिलेगा, क्योंकि उनके लिए राजनीति के दरवाजे अब और बड़े स्तर पर खुलने वाले हैं।

लोकसभा में बढ़ेंगी 14 नई सीटें
अभी मध्य प्रदेश में लोकसभा की कुल 29 सीटें हैं। नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 43 हो जाएगी। बड़ी बात यह है कि महिला आरक्षण लागू होने के बाद इन 43 सीटों में से 14 सीटें सीधे तौर पर महिला सांसदों के लिए आरक्षित रहेंगी। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं के लिए भी अलग से कोटा तय किया जाएगा।

विधानसभा भी होगी और बड़ी
सिर्फ लोकसभा ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश विधानसभा की ताकत भी बढ़ेगी। वर्तमान में विधानसभा में 230 सदस्य होते हैं, लेकिन नए परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 345 हो सकती है। यानी प्रदेश में विधायकों की संख्या में भी बड़ा इजाफा होगा, जिससे विकास कार्यों और जनता के प्रतिनिधित्व में मदद मिलेगी।

पार्टियों ने शुरू की तैयारी
इस ऐतिहासिक बदलाव को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ने ही अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है:
भाजपा ने अपने संगठन और मोर्चों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा दी है। पार्टी ने राज्य स्तर से लेकर बूथ कमेटियों तक में कम से कम 33 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य कर दिया है। अब भाजपा ‘महिलाओं के विकास’ के बजाय ‘महिलाओं के नेतृत्व में विकास’ पर फोकस कर रही है।
कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पार्टी ने महिला नेतृत्व तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रदेश इकाई की अध्यक्ष रीना बोरासी सोतिया की टीम में 46 प्रतिशत नए और युवा चेहरों को शामिल किया गया है, ताकि आने वाले समय के लिए महिला नेताओं की नई फौज तैयार हो सके।

कब लागू होंगे ये बदलाव?
इन बदलावों को लागू करने के लिए सरकार संसद में 131वां संविधान संशोधन विधेयक ला रही है। हालांकि, यह सब जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव तक जमीन पर उतारा जा सकता है।

राजनीतिक विवाद और सवाल
जहाँ एक तरफ इसे ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, वहीं विपक्ष ने कुछ सवाल भी उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था क्यों नहीं है। साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ एक चुनावी घोषणा बनकर रह जाएगी या वाकई 2028-29 तक लागू हो पाएगी?
कुल मिलाकर, आने वाले कुछ सालों में मध्य प्रदेश का चुनावी भूगोल और गणित पूरी तरह बदलने वाला है, जिसमें आधी आबादी की हिस्सेदारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होगी।