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12 June 2026

राज्य में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला मुकाबला अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त होने के बाद, नाम वापस लेने की तय समय सीमा खत्म होते ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया है।
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोपहर तीन बजे की समय सीमा समाप्त होने के बाद आधिकारिक तौर पर भाजपा प्रत्याशियों की जीत की घोषणा की और उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र भी सौंप दिया। भाजपा की तरफ से इस बार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग से कांग्रेस को नहीं मिली राहत
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस को कानूनी मोर्चे पर भी करारा झटका लगा है। दरअसल, कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म मंगलवार को निरस्त कर दिया गया था। भाजपा ने आपत्ति जताई थी कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी है, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका फॉर्म खारिज कर दिया।
इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने बुधवार देर रात तक चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखा, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस ने बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात करीब 1 बजकर 48 मिनट पर सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन याचिका दायर की। कांग्रेस चाहती थी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर तुरंत सुनवाई करे और रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इतनी जल्दबाजी में कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया और इस मामले की सुनवाई के लिए शुक्रवार का दिन तय किया। कोर्ट ने चुनाव आयोग की तरफ से कैविएट भी दायर करवाई है ताकि उनका पक्ष भी सुना जा सके।

राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
इस पूरे मामले पर राजनीति गरमा गई है और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखे सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटनाक्रम को वोट चोरी और सीट चोरी का मिलाजुला खेल बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मीनाक्षी नटराजन ने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे और उन पर कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा की एक बेबुनियाद आपत्ति पर यह फैसला लिया है ताकि भाजपा के लिए जीत की राह आसान हो सके।
वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर के रवैये पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और अवैध तरीके से रद्द किया गया है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, तो चुनाव आयोग को इतनी जल्दबाजी में परिणाम घोषित करने और भाजपा उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र देने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाएं अब स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय सत्ता पक्ष के एजेंट की तरह काम कर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बताया है।

मध्य प्रदेश विधानसभा का गणित और भाजपा की रणनीति
अगर मध्य प्रदेश विधानसभा की सीटों के समीकरण को देखें, तो 230 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा के पास अपने 164 विधायक हैं। इस संख्या बल के आधार पर भाजपा आसानी से दो सीटें जीत रही थी। वहीं कांग्रेस के पास 62 विधायक थे, जिससे उसकी एक सीट पक्की मानी जा रही थी। कांग्रेस ने इसी उम्मीद के साथ पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। लेकिन भाजपा ने तीसरी सीट पर भी महेश केवट को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया था। भाजपा की रणनीति रंग लाई और मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म खारिज होते ही मुकाबला शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया।

देश के अन्य राज्यों से भी आए नतीजे
मध्य प्रदेश के अलावा देश के कुछ अन्य राज्यों से भी राज्यसभा चुनाव के निर्विरोध नतीजे सामने आए हैं। कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत पार्टी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। वहीं भाजपा के भी एक उम्मीदवार को वहां से जीत मिली है। कर्नाटक से चुने गए नए सदस्यों में कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार नसीर अहमद, मंसूर अली खान और भाजपा के प्रदेश प्रधान शामिल हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश से भी वाईएसआर कांग्रेस के चार उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। इन नवनिर्वाचित सदस्यों में वाईएसआर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव वी विजयसाई रेड्डी, बीडा मस्तान राव, आर कृष्णैया और एस निरंजन रेड्डी शामिल हैं।
मध्य प्रदेश में भाजपा के तीनों नए सांसदों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बधाई दी है और भरोसा जताया है कि वे संसद में राज्य के विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।


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