4 जून 2026: खबर प्रधान डेस्क:
मध्य प्रदेश का ग्वालियर जिला अब अपनी एक खास विरासत के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी बड़ी पहचान बना चुका है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता, मजबूती और लंबे समय तक चलने वाली उपयोगिता के लिए मशहूर ‘ग्वालियर सैंडस्टोन’ (बलुआ पत्थर) अब वैश्विक बाजार का एक बड़ा ब्रांड बन गया है। मध्य प्रदेश शासन की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत मिले प्रोत्साहन से इस उद्योग को एक नई रफ्तार मिली है, जिससे इसका निर्यात लगातार बढ़ता जा रहा है।
सालाना 56 करोड़ रुपये का हो रहा है एक्सपोर्ट:
मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम से मिले आंकड़ों के अनुसार, ग्वालियर से हर साल लगभग 68 हजार टन सैंडस्टोन अलग-अलग देशों में निर्यात किया जा रहा है। इस सालाना निर्यात की कुल कीमत करीब 56 करोड़ रुपये है। ग्वालियर के इस खास पत्थर की मांग यूके, इटली, फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर जैसे खाड़ी देशों में बहुत ज्यादा है। इन देशों के बाजारों में ग्वालियर के सैंडस्टोन उत्पादों की विशेष मांग बनी हुई है।
शिल्प कौशल और बेहतरीन गुणवत्ता ने दिलाई पहचान:
ग्वालियर की सैंडस्टोन टाइल्स अपनी बेजोड़ गुणवत्ता के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ के स्थानीय शिल्पकार और कारीगर इस पत्थर से जाली पैनल, खूबसूरत मूर्तियां, स्टोन क्राफ्ट, शानदार वास्तुकला की संरचनाएं, पेंगुइन स्टोन और सजावटी हस्तशिल्प वस्तुएं तैयार करते हैं। इन हस्तनिर्मित कलाकृतियों को देश और विदेश के बाजारों में बेहद पसंद किया जाता है।
सरकारी प्रोत्साहन से मिल रहा है शिल्पियों को बढ़ावा:
इस पारंपरिक उद्योग और शिल्पकारों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लगातार मदद कर रही है। वर्तमान में ग्वालियर के स्टोन पार्क में लगभग 50 इकाइयां (इंडस्ट्रीज) काम कर रही हैं। इसके अलावा 25 अन्य इकाइयां भी सैंडस्टोन के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और शिल्प निर्माण के काम से जुड़ी हुई हैं। सरकार द्वारा इस उद्योग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यही वजह है कि आज जिले के करीब 150 पत्थर शिल्पी भारत सरकार में रजिस्टर्ड हैं, जिनमें 50 महिला शिल्पी भी शामिल हैं, जो इस हुनर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही हैं।


Leave a Reply