बाढ़ में बहकर कर ली थी सरहद पार:
जासूस समझ कर किया गिरफ्तार:

पंजाब के सिंध प्रांत से एक अच्छी खबर सामने आई है।
दरअसल ढाई साल पाकिस्तान की जेल में रहने के बाद पंजाब के सिंधवा बेट के रहने वाले हरविंदर अपने देश वापस आ गए हैं।
पंजाब के सिंधवा बेट  के रहने वाले हरविंदर सिंह करीब ढाई साल पहले बाढ़ में बहकर गलती से पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए।
पाकिस्तानी  में उन्हें जासूस समझ कर गिरफ्तार कर लिया गया और अमानवीय यातनाएं भी दी गई।


पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुए हरविंदर और रतन पाल को वहां की अदालत ने डेढ़ साल की सजा सुनाई थी।  हालांकि पाक रेंजर्स को यकीन हो गया था कि यह जासूस नहीं है।  बल्कि एक हादसे के दौरान पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो गए हैं । हरविंदर की बहन बलविंदर कौर ने बार-बार लुधियाना डीसी से गुहार लगाई।  इस दौरान प्रशासन की सक्रियता और केंद्र सरकार को भेजे गए पत्रों के परिणाम स्वरूप कूटनीतिक प्रयास सफल हुए और आखिरकार हरविंदर की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी।
अब वे अटारी बाघा बॉर्डर से अपने दोस्त रतनपाल के साथ भारत लौट आए हैं । हरविंदर ने बताया कि यातनाओं ने शरीर को तोड़ दिया लेकिन उम्मीद थी कि एक दिन जरूर वापस लौटेंगे।
दरअसल 27 जुलाई 2023 को हरविंदर अपनी बहन की मदद के लिए फिरोजपुर के गांव चांदीवाला गया था ।क्षवहां दरिया के पास बंधे पशुओं को निकालते समय बांध टूट गया और वह अपने दोस्त रतनपाल के साथ तेज बहाव में बह गया।
इस बहाव में यह दोनों पाकिस्तान पहुंच गए । जहां पाक रेंजर्स ने उन्हें पकड़ लिया । 28 दिन तक हिरासत में रहकर उन्हें बेरहमी से पीटा गया और जासूसी कुबूल करवाने का दबाव दिया गया।

इन दोनों को पाकिस्तानी पुलिस के हवाले कर दिया गया। यहां इनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और थाने की गंदगी साफ कराने जैसी यातनाएं दी गईं। इन्हें 7 दिन की पुलिस डिमांड दी गई और इसके बाद इन्हें अदालत में पेश किया गया इसके बाद इन्हें लाहौर की सेंट्रल भेज दिया गया । यहां पहले से ही कई भारतीय कैदी थे । जिनके लिए अलग बैरक  बने हुए थे । यहां करीब 20 भारतीय जेल में थे । कई भारतीय गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे थे फिर भी उनसे काम कराया जाता था और कड़ी यातनाएं दी जाती थी।  लाहौर की अदालत ने सीमा पार करने के आरोप में 1 साल की सजा ₹10 हजार का जुर्माना लगाया था।  जुर्माना न भरने पर सजा और बढ़ा दी गई थी।


31 जनवरी को हरविंदर बाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौटा और 1 फरवरी को अपने गांव पहुंच गया।
इन भावुक क्षणों में पूरे परिवार की आंखें नम हो गई। पाकिस्तान में दी गई यातनाओं से परेशान होकर अब वह सुकून चाहता है।