29 मई 2026
भोपाल:
नोएडा की जानी-मानी मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की भोपाल में हुई संदिग्ध मौत के मामले में एक बहुत बड़ा मोड़ आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई (CBI) की टीम ने गुरुवार की शाम तिष्या शर्मा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से पहले सीबीआई की पांच सदस्यों की टीम ने, जिसका नेतृत्व डीआईजी अब्दुल जब्बार कर रहे थे, गुरुवार सुबह करीब 10 बजे गिरिबाला सिंह के घर पर दस्तक दी। इसके बाद लगभग 8 घंटे तक उनसे कड़ी पूछताछ की गई।
पूछताछ खत्म होने के बाद सीबीआई टीम उन्हें मिंट पैलेस स्थित अपने कैंप कार्यालय ले गई। देर रात तक चली इस कार्रवाई के बाद सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को आमने-सामने बिठाकर भी पूछताछ की। आपको बता दें कि त्विषा के पति समर्थ सिंह पहले से ही सीबीआई की रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है। मुख्य आरोपी समर्थ सिंह की यह रिमांड 29 मई तक की है।
घर पर की गई मैपिंग और सबूत जुटाने की कोशिश
गुरुवार को जब सीबीआई की टीम गिरिबाला सिंह के घर पहुंची, तो सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। घर के बाहर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि जांच में कोई बाधा न आए। पूछताछ के दौरान सीबीआई की टीम ने सुरक्षा कारणों से अपनी गाड़ियां घर के अंदर पार्क कीं और उसी परिसर में स्थित मैनेट में बैठकर पूरी स्थिति को संभाला।
जांच टीम ने घटना स्थल यानी घर के अंदर की पूरी मैपिंग की और अलग-अलग बिंदुओं पर बारीकी से तफ्तीश की। इसके बाद ही गिरिबाला सिंह को हिरासत में लिया गया। सीबीआई के अधिकारियों ने गिरिबाला से तिष्या और समर्थ के रिश्तों को लेकर कई तीखे सवाल किए। जांच एजेंसी ने परिस्थिति जन्य साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की है। इस दौरान टीम ने घर से कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज और जरूरी दस्तावेज भी जब्त किए हैं, जिन्हें जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। दोनों से देर रात तक पूछताछ करने के बाद सीबीआई अब उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी में है।
हाई कोर्ट ने क्यों रद्द की थी अग्रिम जमानत?
इस मामले में गिरिबाला सिंह ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई थी, जिसे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ ने बुधवार देर रात (करीब 1 बजे) रद्द कर दिया था। इससे पहले हाई कोर्ट ने 15 मई को उन्हें अंतरिम अग्रिम जमानत दी थी।
जस्टिस सत्यनारायण मिश्रा की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए साफ कहा कि अग्रिम जमानत का आदेश तथ्यों की अनदेखी पर आधारित नहीं होना चाहिए। कोर्ट का मानना था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध सबूतों, वॉट्सऐप चैट्स और गवाहों के बयानों पर पूरी तरह विचार नहीं किया था, जबकि सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ गंभीर और स्पष्ट आरोप हैं। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी नोट किया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं।
न्यायिक सेवा में लंबा अनुभव रहा है गिरिबाला सिंह का
गिरफ्तार की गईं गिरिबाला सिंह कोई साधारण बैकग्राउंड से नहीं हैं, बल्कि वह न्यायिक सेवा में कई बड़े पदों पर रह चुकी हैं। उन्होंने वर्ष 1988 में मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा परीक्षा पास की थी और वह साल 2010-2011 में उच्च न्यायिक सेवा (क्लास-2) की सदस्य बनीं। साल 2018 में वह भोपाल में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर भी रहीं। इसके अलावा वह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलसचिव (Registrar) और भोपाल की जिला न्यायाधीश भी रह चुकी हैं। वर्तमान में वह भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-2 की अध्यक्ष के पद पर कार्य कर रही थीं। वर्ष 2024 में ही वह भोपाल में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।
सलाखों के पीछे जापानी मर्डर मिस्ट्री ‘बटर’ का कनेक्शन!
इस पूरे मामले में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आ रही है, वह है एक जापानी किताब ‘बटर’ (Butter) का कनेक्शन। दरअसल, त्विषा के पति समर्थ सिंह पिछले कुछ दिनों से सीबीआई की हिरासत में हैं और जेल के बैरक में वह अपना समय काटने के लिए असाको युजुकी का लिखा मशहूर जापानी उपन्यास ‘बटर’ पढ़ रहे हैं।
यह उपन्यास वर्ष 2017 में जापान में प्रकाशित हुआ था और यह वहां की एक कुख्यात महिला सीरियल किलर ‘कोनिका कनाए’ की सच्ची घटना से प्रेरित है। इस कहानी में एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई गई है जो पुरुषों को अपनी बातों और भावनात्मक जाल में फंसाकर उनसे पैसे ऐंठती है और फिर उनके बीच समानताएं दिखाकर उनकी हत्या कर देती है।
सीबीआई की हिरासत में समर्थ सिंह का इस किताब को पढ़ना कई तरह के सवाल खड़े कर रहा है। कानून और अपराध विज्ञान के जानकारों का मानना है कि ऐसे गंभीर मामलों में आरोपी अक्सर अपने मानसिक तनाव को कम करने या फिर जांच प्रक्रिया को समझने के लिए इस तरह के क्राइम थ्रिलर और मनोवैज्ञानिक उपन्यासों का सहारा लेते हैं। इस किताब के कनेक्शन ने पुलिस और कानूनी गलियारों में इस मर्डर मिस्ट्री को लेकर उत्सुकता और ज्यादा बढ़ा दी है।
कानूनी दांवपेंच और सरकारी पक्ष की मजबूती
इस मामले में जब गिरिबाला सिंह को अंतरिम राहत मिली थी, तब सरकारी वकील और पुलिस प्रशासन पर कई सवाल उठे थे। लेकिन इस बार सरकार ने पैरवी को बेहद मजबूत किया। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के नेतृत्व में वकीलों की टीम ने कोर्ट के सामने पुख्ता सबूत रखे। उन्होंने दलील दी कि तिष्या की मौत बेहद संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है और हाई कोर्ट को मृतका के माता-पिता की भावनाओं और परिस्थितियों की गंभीरता को देखना चाहिए।
सरकारी पक्ष ने पुरजोर तरीके से कहा कि कोर्ट ने पहले जो अंतरिम जमानत दी थी, उससे जांच प्रभावित हो रही थी। आखिरकार हाई कोर्ट ने सरकार की इन दलीलों को सही माना और अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिसके तुरंत बाद सीबीआई ने एक्शन लेते हुए गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया।


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