नासा ने माना, सुनीता विलियम्स का स्पेस मिशन हादसे जैसा
संवाददाता
21 February 2026
अपडेटेड: 12:27 PM 0stGMT+0530
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष मिशन अब नासा ने आधिकारिक रूप से हादसे की श्रेणी में माना है। यह मिशन सुरक्षा और तकनीकी स्तर पर गंभीर विफलता माना गया है, जिसने अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनीता विलियम्स जब अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की आठ दिन की यात्रा के लिए रवाना हुई थीं, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि वापसी में इतना लंबा समय लग जाएगा। तकनीकी समस्याओं के कारण वह और उनके सहयोगी बुच विलमोर एक साल तक अंतरिक्ष में फंसे रहे, जिससे मिशन की जटिलताएं सामने आईं।
नासा ने स्पष्ट किया कि बोइंग स्टारलाइनर मिशन इंजीनियरिंग और नेतृत्व दोनों स्तर पर असफल रहा। इस मिशन में आई खामियों को लेकर एजेंसी ने गहन जांच की और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा भी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में नासा प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने कार्यक्रम को पटरी पर रखने के लिए सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज करने पर एजेंसी और कंपनी दोनों की आलोचना की। रिपोर्ट में कहा गया कि समय पर जरूरी फैसले नहीं लिए गए, जिससे जोखिम बढ़ा।
नासा ने इस मिशन को टाइप-ए दुर्घटना के रूप में माना है, जो सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है। यह वही श्रेणी है, जिसमें पहले चैलेंजर और कोलंबिया स्पेस शटल हादसे शामिल किए गए थे। कोलंबिया हादसे में भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का भी निधन हुआ था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरिक्ष सुरक्षा और निजी कंपनियों की जिम्मेदारी पर नई बहस शुरू हो गई है।