1 मई 2026
कराची/नई दिल्ली:
पाकिस्तान के बहावलपुर में एक सड़क हादसे में खूंखार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष कमांडर मौलाना सलमान की मौत हो गई है। यह वही आतंकवादी था जिसने 2019 में पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले की साजिश रची थी, जिसमें भारत के 40 वीर जवान शहीद हो गए थे। मौलाना सलमान की मौत पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर:
खबरों के मुताबिक, यह हादसा बुधवार को बहावलपुर के मरकज के पास हुआ, जहां मौलाना सलमान को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौलाना सलमान की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना पाकिस्तान में आतंकवादियों की संदिग्ध परिस्थितियों में हो रही मौतों के सिलसिले की नवीनतम कड़ी है, जो आतंकवादी संगठनों के भीतर आंतरिक कलह या किसी बाहरी एजेंसी द्वारा लक्षित हत्याओं की ओर इशारा करती है।
पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड:
मौलाना सलमान जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता था। उसने पुलवामा हमले के अलावा 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले में भी अहम भूमिका निभाई थी। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मौलाना सलमान को लंबे समय से ढूंढ रही थीं।
ISI की संदिग्ध भूमिका:
मौलाना सलमान की मौत के बाद, बहावलपुर में हुए उसके जनाजे में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के वरिष्ठ अधिकारियों को देखा गया है। जनाजे में ISI अधिकारियों की मौजूदगी ने एक बार फिर पाकिस्तान के आतंकवादियों के साथ संबंधों और उनके “अच्छे” और “बुरे” आतंकवादियों के बीच भेदभाव करने की नीति पर सवालिया निशान लगा दिया है।
पाकिस्तान में आतंकवाद का बदलता चेहरा:
पाकिस्तान में आतंकवादियों की संदिग्ध मौतों के पीछे आंतरिक शक्ति संघर्ष या “टारगेटेड कीलिंग्स” का अंदेशा जताया जा रहा है। कुछ विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान द्वारा “अवांछित” आतंकवादियों से छुटकारा पाने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने खुद को आतंकवाद से लड़ने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।
वैश्विक आतंकवाद पर प्रभाव:
मौलाना सलमान की मौत जैश-ए-मोहम्मद के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन यह वैश्विक आतंकवाद पर कितना प्रभाव डालेगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। आतंकवादी संगठन अक्सर अपने नेताओं की मौत के बाद नए नेतृत्व और रणनीतियों के साथ उभरते हैं।
पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर मौलाना सलमान की मौत एक महत्वपूर्ण घटना है, जो पाकिस्तान में आतंकवाद के बदलते चेहरे और वहां आतंकवादी संगठनों और ISI के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करती है। हालांकि यह आतंकवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन वैश्विक आतंकवाद पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों पर अभी और अध्ययन करने की आवश्यकता है।


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