8 June 2026
भोपाल।
अभिनेत्री और मॉडल त्विषा शर्मा की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। उच्चतम न्यायालय के संज्ञान और उच्च न्यायालय के दखल के बाद यह केस पिछले तीन हफ्तों से काफी चर्चा में है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की टीम अब भोपाल न्यायालय में अभियोग पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की अंतिम तैयारियों में जुट गई है।
हालांकि, कोर्ट में इसे सौंपने से पहले सीबीआई की टीम इस पूरे केस की डायरी और अभियोग पत्र को दिल्ली स्थित सीबीआई निदेशक (डायरेक्टर) के पास भेजेगी, ताकि वहां से इसे कोर्ट में प्रस्तुत करने की आधिकारिक अनुमति मिल सके।
पुख्ता सबूतों और गवाहों के साथ तैयार हो रही चार्जशीट
सीबीआई के विशेष दल ने इस मामले को पूरी तरह मजबूत बनाने के लिए भौतिक और पुख्ता सबूत जुटाकर काम शुरू कर दिया है। इस अभियोग पत्र को तैयार करने में भोपाल और दिल्ली एम्स से आई डॉक्टरों की टीम की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया जा रहा है। इसके अलावा, पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के आवास पर किए गए नाट्य रूपांतरण (क्राइम सीन रीक्रिएशन) के सभी बिंदुओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
जांच एजेंसी ने त्विषा और उसके पति समर्थ सिंह के बीच के रिश्तों की हकीकत जानने के लिए उनकी मोबाइल चैटिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्य भी जुटाए हैं। माता-पिता की तरफ से लगाए गए आरोपों और 62 से अधिक गवाहों के बयानों को भी इस चार्जशीट का हिस्सा बनाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह अभियोग पत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह तक पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।
जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट की खबरों पर लगा विराम, डिप्टी जेलर ने सौंपी रिपोर्ट
इस बीच, भोपाल केंद्रीय जेल में बंद पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को जेल के भीतर ‘अतिविशिष्ट श्रेणी’ (वीआईपी ट्रीटमेंट) की सुविधाएं मिलने की अफवाहें उड़ रही थीं। इन खबरों की सच्चाई जानने के लिए दो दिन पहले जेल मुख्यालय से उप महानिरीक्षक संजय पांडे अचानक भोपाल केंद्रीय जेल पहुंचे। उन्होंने वहां की हकीकत देखी और अपनी एक गुप्त रिपोर्ट बनाकर महानिदेशक जेल को सौंप दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व न्यायाधीश को किसी वीआईपी सेल में नहीं, बल्कि महिला वार्ड की नई बैरक में रखा गया है, जहां आमतौर पर सजायाफ्ता और ऐसी विचाराधीन महिला कैदियों को रखा जाता है जो गर्भवती हों या जिनके साथ उनके छोटे बच्चे हों। वहीं उनके बेटे समर्थ सिंह को चार नंबर वार्ड की नई बैरक में रखा गया है। समर्थ सिंह की बैरक में उनके अलावा छह और बंदी हैं। जेल प्रबंधन के आदेश पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वहां सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया है और छह बंदी उनकी निगरानी व अन्य कार्य करते हैं।
जेल में पांच दिन बाद खड़े-खड़े हुई मां-बेटे की मुलाकात
जेल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेल के नियमों के मुताबिक हर रविवार को उन बंदियों की आपस में मुलाकात कराई जाती है जिनके माता-पिता, भाई-बहन या कोई अन्य खून के रिश्तेदार उसी जेल में बंद हों। गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह 2 जून को जेल में दाखिल हुए थे, जिसके बाद पहला रविवार मां-बेटे की मुलाकात के लिए तय किया गया।
जब जेल के नियमों के मुताबिक दोनों को आमने-सामने लाया गया, तो पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने दरी पर बैठने में असमर्थता जताई और बैठने के लिए कुर्सी की मांग की। उन्होंने खुद को विशिष्ट श्रेणी का बताते हुए अपनी बात रखी, लेकिन जेल प्रबंधन ने इससे साफ इनकार कर दिया। आखिरकार, जेल में बंद होने के पांच दिन बाद मां और बेटे के बीच खड़े-खड़े ही बातचीत कराई गई।


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