धार

भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मस्जिद पक्ष के लिए परिसर से अलग स्थान पर नमाज का प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं l इस आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल वैकल्पिक भूमि के चयन को लेकर खड़ा हुआ है l हालांकि स्थानीय प्रशासन ने अभी तक किसी भी स्थान का चयन नहीं किया है लेकिन हिंदू पक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है l मंदिर पक्ष का कहना है की भोजशाला परिसर के 300 मीटर के संरक्षित दायरे के भीतर नमाज की किसी भी वैकल्पिक व्यवस्था को वे स्वीकार नहीं करेंगे l इस परिधि से बाहर यदि मुस्लिम समाज को जमीन दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी l दूसरी तरफ जिला प्रशासन का कहना है कि वह देश की शीर्ष अदालत के लिखित आदेश के प्रमाणित प्रति का इंतजार कर रहे हैं जिसके विस्तृत अध्ययन के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी l

चर्चा में शामिल कर संभावित वैकल्पिक स्थान

भोजशाला के आसपास जिन चार क्षेत्रों को संभावित नमाज स्थल के रूप में देखा जा रहा है वह इस प्रकार हैं

स्थानीय किसानों की कृषि भूमि

कृषि उपज मंडी की जमीन

दयानंद मार्ग क्षेत्र

लकड़ी पीठ क्षेत्र की निजी जमीन

राजस्व अभिलेखों के आंकड़ों के अनुसार गौशाला के पास लगभग 13 बीघा भूमि मस्जिद पक्ष की विभिन्न संस्थाओं के नाम दर्ज बताई जा रही है l दावा है कि इस जमीन में उर्स कमेटी और बाबा कमाल मौला से जुड़ी हुई भूमि भी शामिल है l

भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा का कहना है की भोजशाला का 300 मी का क्षेत्र एक संरक्षित दायरा है l इसके बाहर यदि प्रशासन मुस्लिम समाज को नमाज के लिए भूमि उपलब्ध कराता है तो हम इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं करेंगे l वही अध्यक्ष कमल मौला वेलफेयर सोसाइटी अब्दुल समद का कहना है कि हम देश के सर्वोच्च अदालत के इस निर्णय का सम्मान करते हैं और इससे संतुष्ट हैं l कोर्ट के निर्देशों के तहत प्रशासन को हमारे लिए नमाज  हेतु उचित स्थान की व्यवस्था करनी चाहिए l

प्रशासन के स्तर पर अगली रणनीति

सरकारी सूत्रों के अनुसार जैसे ही आदेश की कॉपी प्राप्त होगी राजस्व, पुलिस विभाग और  संबंधित विभागों की एक संयुक्त टीम भोजशाला के आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण करेगी l इसके उपरांत  यह तय किया जाएगा की अदालत के दिशा निर्देशों के अनुसार शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच होने वाली नमाज के लिए कौन सा स्थान उपयुक्त और सुरक्षित रहेगा l शहर काजी वकार सादिक के अनुसार आदेश के प्रामाणिक प्रति मिलने के बाद मस्जिद कमेटी  वरिष्ठ समाज जनों और शुक्रवार की नमाज का प्रबंध देखने वालों की एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी जिसमें आगे की रणनीति तय होगी l

अयोध्या मामले से कितना अलग है भोजशाला का यह मामला

भोजशाला का यह मामला अयोध्या विवाद से पूरी तरह भिन्न है l जहां 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सुन्नी सेंट्रल vakf बोर्ड को धनीपुर गांव में 5 एकड़ की वैकल्पिक भूमि देने का अंतिम आदेश दिया था l वही भोजशाला मामले में अभी शीर्ष अदालत का कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है यह एक अंतरिम व्यवस्था है l जिसके तहत कोर्ट ने केवल शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर के नजदीक एक खुले स्थान की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं मुख्य मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है l

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