1 मई 2026
भोपाल:

मध्यप्रदेश में जनगणना-2027 महाअभियान का औपचारिक आगाज़ हो चुका है। केंद्र सरकार के जनगणना विभाग के निर्देशानुसार, आज यानी शुक्रवार 1 मई से राज्य भर में प्रगणक और सुपरवाइजर घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम शुरू कर देंगे। यह जनगणना का पहला चरण है, जिसके अंतर्गत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का फील्ड कार्य किया जाएगा।
यह अहम जानकारी प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने गुरुवार को एक पत्रकारवार्ता में साझा की। छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी गोयल के पास वर्तमान में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में जनगणना कार्य की ज़िम्मेदारी है। इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन भी उपस्थित रहे।
लाखों परिवार करा चुके हैं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन
निदेशक गोयल ने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की प्रक्रिया 16 अप्रैल से ही चल रही है। बुधवार तक की स्थिति में, राज्य के 5.81 लाख (5,81,152) परिवारों ने पहले ही ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करा दी है। हालांकि, मकान स्व-गणना की प्रक्रिया में कुछ समय और लगेगा।
फील्ड में उतरी कर्मचारियों की भारी-भरकम टीम
इस महाअभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए मध्यप्रदेश में लगभग 1.70 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें शामिल हैं:
* 72 प्रमुख जनगणना अधिकारी
* 440 जिला स्तरीय अधिकारी
* 989 चार्ज अधिकारी
* 3028 मास्टर और फील्ड ट्रेनर्स
* 1 लाख 41 हजार प्रगणक (जानकारी जुटाने वाले)
* 24 हजार 300 सुपरवाइजर (निरीक्षण करने वाले)
इस चरण के दौरान, राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में ये कर्मी हर घर जाकर प्रत्येक मकान, परिवार और उनकी संरचना से संबंधित आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 1 लाख 37 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं।

अपार्टमेंट परिसरों के लिए विशेष रणनीति
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती अपार्टमेंट संस्कृति और बंद गेट वाली कॉलोनियों को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन ने गणना कार्य के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। आवासी समितियों और प्रबंधन समूहों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं ताकि वे प्रगणकों के प्रवेश में समन्वय और सहयोग करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी परिवार गणना से वंचित न रहे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी आदि के माध्यम से जनगणना के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए गए हैं।

लापरवाही की कोई जगह नहीं, डेटा होगा डिजिटल
मुख्य सचिव अनुराग जैन के निर्देशों के बाद, जनगणना निदेशक गोयल ने साफ किया कि गणना कार्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बार मकान सूचीकरण और जनगणना की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यमों से होगी और प्रगणक मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए जानकारी दर्ज करेंगे। बैठक में सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और फेक न्यूज पर कड़ी निगरानी रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। जनगणना संबंधी जानकारी और सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 भी उपलब्ध कराया गया है।

डेटा रहेगा पूरी तरह गोपनीय
प्रशासन ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि उनके द्वारा दी गई सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहेगी। जनगणना अधिनियम के अनुसार, एकत्र किए गए आंकड़ों का उपयोग टैक्स, पुलिस या किसी भी जांच प्रक्रिया में नहीं किया जा सकता है। इन आंकड़ों का इस्तेमाल केवल प्रदेश और देश के विकास की योजनाएं तैयार करने के लिए किया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे घर पहुंचने वाले प्रगणकों को सही जानकारी दें।
बिना अनुमति वायरल की जानकारी तो होगी कार्रवाई
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्थानीय मीडिया, रेडियो, सोशल मीडिया और जनसंपर्क माध्यमों के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाए। हालांकि, बिना अनुमति के कोई भी जानकारी मीडिया में वायरल करने पर कड़ा प्रतिबंध रहेगा।

कॉलेज प्राध्यापकों ने जताई आपत्ति
एक तरफ जहां प्रशासन जनगणना की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के प्राध्यापक संघ ने जनगणना कार्य में उनकी ड्यूटी लगाए जाने पर आपत्ति जताई है। संघ ने अवर मुख्य सचिव को दिए ज्ञापन में मांग की है कि शासकीय महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापकों या प्राध्यापकों की ड्यूटी केवल स्तर-4 में फील्ड ट्रेनर के रूप में ही लगाई जा सकती है। जबकि नगर निगम ज़ोन के चार्ज ऑफिसर ने प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों की ड्यूटी स्तर-5 में प्रगणक/पर्यवेक्षक के रूप में लगाई है, जो कि नियमानुसार नहीं है। संघ का कहना है कि मई में महाविद्यालयों में परीक्षाएं और प्रवेश प्रक्रिया होने वाली है, जिससे ये कार्य प्रभावित होंगे। वे जनगणना कार्य से मुक्ति की मांग कर रहे हैं।