13 अप्रैल 2026
मुंबई:
सुरों की मल्लिका और भारतीय संगीत की दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने रविवार को अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरी दुनिया में उनके चाहने वाले और संगीत प्रेमी गहरे शोक में हैं। करीब सात दशकों तक अपनी जादुई आवाज से फिल्मी दुनिया पर राज करने वाली आशा ताई ने संगीत के एक बड़े युग का अंत कर दिया है।
अस्पताल में चल रहा था इलाज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उन्हें आईसीयू यानी में रखा गया था, जहाँ डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी। दुनिया भर में उनके प्रशंसक उनकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे, लेकिन रविवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके बेटे आनंद भोसले ने अधिकारिक तौर पर इस दुखद खबर की पुष्टि की है।
आज होगा अंतिम संस्कार
आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को शाम चार बजे मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में किया जाएगा। उनके अंतिम दर्शन के लिए मनोरंजन और राजनीतिक जगत की बड़ी हस्तियों के जुटने की संभावना है।
लता दीदी और आशा ताई के बीच अद्भुत संयोग
दिलचस्प और भावुक करने वाली बात यह है कि आशा भोसले के निधन और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के निधन के बीच कुछ बेहद खास संयोग देखने को मिले हैं।
पहला संयोग यह है कि दोनों बहनों का निधन 92 वर्ष की उम्र में ही हुआ। जहां लता दीदी का निधन 6 फरवरी 2022 को हुआ था, वहीं आशा जी ने 12 अप्रैल 2026 को 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली।
दूसरा संयोग यह रहा कि दोनों बहनों ने मुंबई के उसी ब्रीच कैंडी अस्पताल में अपनी आखिरी सांसें लीं।
तीसरा संयोग उनकी बीमारी से जुड़ा है। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, लता दीदी की तरह आशा जी का निधन भी मल्टी ऑर्गन फेलियर (कई अंगों का काम करना बंद कर देना) की वजह से हुआ।
आशा भोसले का जाना भारतीय संगीत के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और हर पीढ़ी के दिल में अपनी जगह बनाई।
आशा भोसले की उपलब्धियां: पद्म विभूषण से लेकर गिनीज बुक तक, संगीत की दुनिया में कायम की मिसाल
संगीत जगत की अनमोल रत्न आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में न केवल लाखों दिलों को जीता, बल्कि उन्हें देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया। उनकी उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि वे भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक थीं।
आइए जानते हैं उनकी उपलब्धियों और पुरस्कारों के बारे में विस्तार से।
पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के सम्मान-
आशा जी को साल 2008 में भारत सरकार ने देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इससे पहले साल 2000 में उन्हें भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया। ये पुरस्कार उनके भारतीय संगीत में बेमिसाल योगदान का प्रमाण हैं।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम-
आशा भोसले की आवाज का जादू इतना व्यापक रहा कि साल 2011 में संगीत के इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। उन्होंने कई भाषाओं में हजारों गानों को अपनी आवाज दी थी।
फिल्मफेयर और राष्ट्रीय पुरस्कारों की झड़ी
पुरस्कारों के मामले में भी आशा जी का कोई मुकाबला नहीं था। उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका के रूप में सात बार फिल्मफेयर पुरस्कार मिले। इतना ही नहीं, फिल्मफेयर ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया। इसके अलावा, साल 1981 में फिल्म उमराव जान और साल 1987 में फिल्म इजाजत के गानों के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम
आशा जी की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं रही। साल 1997 में वह ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं। साल 2002 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने उन्हें बीबीसी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें साल 2000 में दुबई में मिलेनियम सिंगर और साल 2014 में दुबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से नवाजा गया।
अन्य राज्य और क्षेत्रीय सम्मान
उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से 18 बार महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। साथ ही, मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित लता मंगेशकर पुरस्कार भी प्रदान किया।
आशा भोसले का करियर और उनके ये सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। संगीत के प्रति उनका समर्पण और उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें एक ऐसी जगह पर खड़ा कर दिया जहां पहुंचना हर किसी का सपना होता है।


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