30 मई 2026
भोपाल;
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर आ रही है, जो आवासीय इलाकों में अपनी दुकानें या व्यापारिक संस्थान चला रहे लोगों की चिंता बढ़ा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद भोपाल नगर निगम सीमा के भीतर बिना अनुमति के चल रहीं दुकानों, गोदामों, शोरूम, लाइब्रेरी और हॉस्टलों की जांच करके उन्हें सील करने की कार्रवाई शुरू होने जा रही है।
नगर निगम ने इसके लिए शहर भर में एक बड़ा सर्वे शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच और सर्वे में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि आवासीय क्षेत्रों (रिहायशी कॉलोनियों) में अवैध रूप से लगभग 25 हजार व्यावसायिक संस्थान और दुकानें धड़ल्ले से चल रही हैं। सबसे दिलचस्प और खास बात यह है कि हाल ही में हुए मकानों के सर्वे और जनगणना के दौरान प्रगणकों (सर्वे करने वालों) को कई घरों के भीतर ही दुकानें और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली, जिससे नगर निगम को इन अवैध ठिकानों की पहचान करने में काफी आसानी हो गई है。
सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा, सीधे होगी सीलिंग
आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगरीय निकायों को अपने-अपने क्षेत्रों की आवासीय कॉलोनियों में चल रही अवैध कमर्शियल गतिविधियों पर सख्ती बरतने का हुक्म दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि भूमि उपयोग (लैंड यूज) का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी करने की खानापूर्ति न की जाए, बल्कि ऐसे अवैध संस्थानों को तुरंत सील किया जाए या वहां से हटाया जाए। सर्वोच्च अदालत का मानना है कि रिहायशी इलाकों का व्यावसायिक इस्तेमाल करना वहां रहने वाले आम नागरिकों के शांतिपूर्ण जीवन जीने के मौलिक अधिकार का सीधा-सीधा उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से इस कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी अदालत में जमा करने को कहा है।
भोपाल के इन इलाकों में चल रहा है सबसे बड़ा खेल
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, भोपाल में लैंड यूज के उल्लंघन के सबसे ज्यादा मामले बड़े और प्रमुख रिहायशी इलाकों की आवासीय कॉलोनियों से सामने आए हैं। इन इलाकों में मुख्य रूप से करोंद, नारियल खेड़ा, कोहेफिजा, अशोका गार्डन, दिलकुशा, जहांगीराबाद, जिंसी, एमपी नगर के आवासीय क्षेत्र, अवधपुरी, नेहरू नगर, पटेल नगर, कॉलोनियां-बस्तियां और भेल टाउनशिप शामिल हैं। करीब 150 बड़े आवासीय क्षेत्र ऐसे चिह्नित किए गए हैं जहां नियमों को ताक पर रखकर दुकानें, होटल, सुपर बाजार, कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी खुलेआम चलाई जा रही हैं।
नियमों के मुताबिक केवल इन्हें ही है अनुमति
नगरीय निकायों के नियमों के अनुसार, आवासीय परिसरों में केवल कुछ निर्धारित प्रोफेशनल्स को ही काम करने की छूट दी गई है। इसके तहत डॉक्टर, वकील, अस्पताल, सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) और आर्किटेक्ट अपने घर या परिसर के एक छोटे हिस्से (नियमों के मुताबिक कुल जमीन का अधिकतम 25 फीसदी हिस्सा) का उपयोग अपने पेशे के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा वहां कोई भी अन्य दुकान, कोचिंग, हॉस्टल, लाइब्रेरी या कमर्शियल एक्टिविटी पूरी तरह से अवैध और गैरकानूनी मानी जाएगी। यहाँ तक कि अगर किसी ने लैंड यूज का उपयोग किराए पर पार्किंग देने के लिए किया है, तो उसे भी अवैध की श्रेणी में रखा जाएगा।
महापौर मालती राय का बयान
इस पूरे मामले पर भोपाल की महापौर मालती राय का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा。 रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रहे व्यावसायिक संस्थानों को प्रतिबंधित करने के लिए हमारा सर्वे तेजी से जारी है। जनगणना और मकानों के सर्वे के आंकड़ों से हमें बहुत मदद मिली है। ऐसे सभी चिन्हित संस्थानों की सूची नगर निगम जल्द ही अंतिम रूप से तैयार कर लेगा और उसके तुरंत बाद जब्ती व सीलिंग की कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया जाएगा।


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