10 June 2026
कश्मीर घाटी को लद्दाख से हर मौसम में जोड़े रखने वाली देश की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजना ‘जोजिला सड़क सुरंग’ ने एक ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है. इस सुरंग के दोनों छोरों का आपस में ऐतिहासिक मिलन (ब्रेकथ्रू) हो गया है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रिमोट बटन दबाकर इस सुरंग के अंतिम हिस्से में ब्लास्ट किया, जिसके बाद पहाड़ के दोनों छोर आपस में मिल गए.
6,800 करोड़ की लागत और एशिया की सबसे लंबी सुरंग
यह सुरंग 11,578 फीट की भारी ऊंचाई पर हिमालय को काटकर बनाई जा रही है. इसकी कुल लंबाई 13.153 किलोमीटर है, जो इसे एशिया की सबसे लंबी सुरंग परियोजनाओं में से एक बनाती है. श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनने वाली यह सिंगल ट्यूब और दो दिशाओं वाली सुरंग लगभग 6,800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही है. इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह रही कि इसके शुरुआती टेंडर की लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये थी, लेकिन सरकार ने सूझबूझ से काम लेते हुए इसकी लागत को करीब 7,000 करोड़ रुपये पर ला दिया, जिससे देश के करीब 5,000 करोड़ रुपये की भारी बचत हुई है.
तय समय से 6 महीने पहले हासिल की कामयाबी
राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (NHIDCL) के अधिकारियों के मुताबिक, इस सुरंग का लगभग 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और यह बड़ी उपलब्धि तय समय से करीब छह महीने पहले ही हासिल कर ली गई है. इस टनल को आम जनता के लिए फरवरी 2028 तक खोलने की योजना है. अगले सात से आठ महीनों तक इसमें सिविल कार्य चलते रहेंगे, जिसके बाद बिजली, वेंटिलेशन और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ मई 2018 में किया था, और 2020 में इसकी निर्माण जिम्मेदारी मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर को मिली थी.
घंटों का सफर अब मिनटों में, चीन-पाकिस्तान को करारा जवाब
वर्तमान समय में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी की वजह से जोजिला दर्रा कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का संपर्क बाकी देश से कट जाता है. इस सुरंग के बन जाने के बाद यह रास्ता पूरे साल चालू रहेगा. सबसे बड़ी राहत यह होगी कि जिस दूरी को तय करने में पहले तीन घंटे से अधिक का समय लगता था, वह सफर अब मात्र 15 मिनट में पूरा हो सकेगा.
सामरिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी यह सुरंग भारत के लिए एक गेम-चेंजर है. यह टनल श्रीनगर से 103 किलोमीटर दूर सोनमर्ग के पास स्थित है, जो चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के बेहद करीब है. टनल के बनने से भारतीय सेना के जवानों, हथियारों और रसद सामग्री को पूर्वी व पश्चिमी लद्दाख के अग्रिम मोर्चों तक बेहद आसानी और तेजी से पहुंचाया जा सकेगा, जिससे सरहद पर सेना की तैयारियां और मजबूत होंगी. नितिन गडकरी ने इस मौके पर गर्व से कहा कि यह परियोजना लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक ‘जीवन रेखा’ साबित होगी.


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