25 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए पंजाब और दिल्ली की राजनीति से एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपने 6 अन्य साथी सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी छोड़ दी है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन सभी नेताओं को मिठाई खिलाकर पार्टी की सदस्यता दिलाई।

कौन-कौन से सांसद हुए भाजपा में शामिल?
राघव चड्ढा के साथ भाजपा में जाने वाले सांसदों में बड़े नाम शामिल हैं:
राघव चड्ढा
स्वाति मालीवाल (पूर्व दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष)
अशोक कुमार मित्तल (LPU के चांसलर)
संदीप पाठक (AAP के राष्ट्रीय महासचिव रहे)
हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
विक्रमजीत सिंह साहनी (समाजसेवी)
बलबीर सिंह सीचेवाल (पर्यावरण प्रेमी)

क्यों छोड़ी पार्टी? राघव चड्ढा ने बयां किया दर्द
पार्टी छोड़ने के बाद राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी अब अपने उन मूल सिद्धांतों से भटक गई है जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस ‘आप’ को उन्होंने 15 साल तक अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने रास्ते से दूर हो गई है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी अब केवल निजी फायदों के लिए काम कर रही है और दिल्ली-पंजाब की जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही।

दलबदल कानून का नहीं होगा असर
तकनीकी तौर पर देखें तो राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के कुल 10 सदस्य थे। इनमें से 7 सांसदों (दो-तिहाई से ज्यादा) के एक साथ पार्टी छोड़ने की वजह से इन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होगा। इसका मतलब है कि इन सभी की राज्यसभा सदस्यता बरकरार रहेगी और ये अब सदन में भाजपा के सदस्य के तौर पर पहचाने जाएंगे।

भाजपा की बढ़ी ताकत
इन 7 नए सदस्यों के आने से राज्यसभा में भाजपा और एनडीए (NDA) की स्थिति और मजबूत हो गई है। अब राज्यसभा में भाजपा गठबंधन का आंकड़ा बहुमत के बेहद करीब पहुंच गया है, जिससे आने वाले समय में सरकार के लिए सदन में बिल पास कराना और आसान हो जाएगा।

स्वाति मालीवाल और संदीप पाठक की नाराजगी
खबरों के मुताबिक स्वाति मालीवाल पिछले काफी समय से पार्टी से अलग-थलग चल रही थीं, खासकर मुख्यमंत्री आवास पर हुए विवाद के बाद से उनकी दूरियां बढ़ गई थीं। वहीं संदीप पाठक भी पार्टी की मौजूदा कार्यप्रणाली से खुश नहीं थे। इन सभी बड़े चेहरों का एक साथ जाना अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।