28 अप्रैल 2026
भोपाल:

मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम के समर्थन में एक महत्वपूर्ण सरकारी संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पेश किए गए इस संकल्प के जरिए केंद्र सरकार के महिला आरक्षण कानून का स्वागत किया गया। हालांकि, सदन में इस मुद्दे को लेकर सत्तापक्ष (भाजपा) और विपक्ष (कांग्रेस) के बीच काफी गहमागहमी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला।

विपक्ष का वॉकआउट और परिसीमन का मुद्दा
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायकों ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि महिला आरक्षण को परिसीमन (Delimitation) के बाद लागू करने की बात क्यों कही जा रही है। विपक्ष का तर्क था कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है, तो इसे वर्तमान 543 सीटों पर ही तुरंत लागू कर देना चाहिए। कांग्रेस ने इसे केवल चुनावी मुद्दा बताया और मांग की कि इसमें देरी करने का कोई औचित्य नहीं है। जब विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के अशासकीय संकल्प को स्वीकार नहीं किया, तो कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।

सत्तापक्ष का कांग्रेस पर पलटवार
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों में बाधा डाल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि देश की दिशा तय करने वाला कदम है। उन्होंने कांग्रेस, सपा और टीएमसी जैसी पार्टियों पर तंज कसते हुए कहा कि इन दलों ने सालों तक महिलाओं के हक को दबाकर रखा है।

विधायक फूल सिंह बरैया के बयान पर हंगामा
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया की एक टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं जिस पर भाजपा की महिला मंत्री कृष्णा गौर और अन्य मंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई। मंत्रियों ने बरैया के बयान को महिलाओं का अपमान बताया और उनसे माफी की मांग की। मुख्यमंत्री ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायकों को अपनी बात की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

सदन में दिखा उत्साह
इस ऐतिहासिक चर्चा को देखने के लिए विधानसभा की दर्शक दीर्घा में बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद थीं। भाजपा के नेताओं ने इसे एक ‘क्रांतिकारी कदम’ बताया और कहा कि इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें पुरुषों के बराबर अधिकार मिलेंगे।

नेताओं के मुख्य बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, महिला आरक्षण से वंशवाद की राजनीति खत्म होगी और समाज की जमीनी स्तर की महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा। वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि भाजपा केवल दिखावा कर रही है, क्योंकि अगर उनकी नीयत साफ होती तो वे इसे बिना किसी शर्त के तुरंत लागू करते।
कुल मिलाकर, हंगामे और बहस के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा ने इस संकल्प पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसे राज्य सरकार अपनी एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है।