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10 June 2026

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के हित में एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शासकीय नौकरियों में दो बच्चों की अधिकतम सीमा से जुड़े कड़े प्रावधान वाले ड्राफ्ट (प्रारूप नियम) को पूरी तरह से निरस्त करने का आदेश दे दिया है. इसके साथ ही इस पुराने नियम को सरकारी पोर्टल से तुरंत हटाने (विलोपित करने) के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.

क्या था यह पुराना नियम और क्यों हो रहा था विरोध?
दरअसल, साल 2001 में तत्कालीन राज्य सरकार ने एक नियम लागू किया था. मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत यह प्रावधान था कि 26 जनवरी 2001 या उसके बाद जिस भी उम्मीदवार के दो से अधिक जीवित बच्चे होंगे, वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य (अपात्र) माना जाएगा. इतना ही नहीं, सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत दो से ज्यादा बच्चे होने को कदाचार (गलत व्यवहार) की श्रेणी में डाल दिया गया था. इस कड़े नियम की वजह से कई युवाओं को सीधी भर्ती और कर्मचारियों को विभागीय नियुक्तियों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था. कर्मचारी संगठन और नौकरी की तलाश कर रहे अभ्यर्थी लंबे समय से इस पाबंदी को खत्म करने की मांग उठा रहे थे.

मुख्यमंत्री का एक्शन और अब आगे क्या होगा?
कर्मचारियों और युवाओं की इस परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद इस मामले का संज्ञान लिया. उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग को साफ निर्देश दिए हैं कि दो से अधिक जीवित संतान होने पर अपात्र माने जाने वाले इस पुराने प्रावधान को हटा दिया जाए.
अब सरकार इस नियम को बदलकर एक नया और संशोधित प्रारूप (नवीन प्रारूप) विधिवत तरीके से जारी करेगी. सरकार के इस संवेदनशील फैसले को प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और सेवारत कर्मचारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.


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