25 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। जनरल नरवणे ने साल 2020 में भारत और चीन के बीच हुए सीमा विवाद पर अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि इस गतिरोध के दौरान भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं खोई है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बड़ी मजबूती के साथ अपनी बात दोहराते हुए कहा कि वह आज भी अपने इस बयान पर कायम हैं।
सेना और राजनीति के बीच की दूरी
जनरल नरवणे ने साफ शब्दों में कहा कि सशस्त्र बलों को राजनीति से जितना हो सके दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना के मामलों में राजनीतिक नेतृत्व सीधे तौर पर दखल नहीं देता है। देश की सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति यानी सीसीएस द्वारा लिए जाते हैं, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी खास बयान को सीधे प्रधानमंत्री से जोड़कर देखना सही नहीं है।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल, यह पूरा विवाद जनरल नरवणे की अभी तक प्रकाशित न हुई किताब के कुछ हिस्सों को लेकर शुरू हुआ है। कांग्रेस नेताओं, खासकर राहुल गांधी ने संसद में बजट सत्र के दौरान इस किताब के कुछ अंशों का हवाला देते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की थी। विपक्ष का आरोप है कि किताब के अंश सीमा विवाद को लेकर कुछ और ही कहानी कहते हैं। हालांकि, पूर्व सेना प्रमुख ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि पूर्वी लद्दाख विवाद के दौरान सरकार पूरी तरह सेना के साथ खड़ी थी।
फैसलों की प्रक्रिया को किया साफ
नरवणे ने प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि सुरक्षा से जुड़े हर अहम फैसले सीसीएस की निगरानी में होते हैं। सेना के भीतर जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वे सेना प्रमुख के आदेश पर होते हैं। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अगर कोई इस सच्चाई को नहीं मानना चाहता, तो यह उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन तथ्यों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


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