26 मई 2026
नई दिल्ली:
नीट पेपर लीक मामले पर सुप्रीम कोर्ट नाराज:
मेडिकल के ग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन के लिए होने वाली नीट-यूजी परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए बेहद दुखद टिप्पणी की और कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने पिछले नीट पेपर लीक हादसे से कोई सबक नहीं सीखा है। अदालत ने नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाने और परीक्षा कराने के लिए एनटीए की जगह एक ज्यादा मजबूत और पूरी तरह स्वायत्त संस्था (इंडिपेंडेंट बॉडी) बनाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर संज्ञान लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस संवेदनशील मामले पर शुक्रवार को दोबारा सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यह आदेश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (फाइमा) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की तरफ से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने निर्देश दिया है कि इन याचिकाओं की कॉपियां सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मामले से जुड़े अन्य पक्षों को भी सौंपी जाएं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने नीट परीक्षा का आयोजन कराने वाली संस्था एनटीए को गुरुवार तक हर हाल में अपना हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।
एनटीए के पुनर्गठन और दोबारा परीक्षा की मांग
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया Medical एसोसिएशन ने वकील तन्वी दुबे के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस याचिका में मांग की गई है कि एनटीए का पूरी तरह से पुनर्गठन किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियां न हों। इसके अलावा याचिका में यह भी गुहार लगाई गई है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कानूनी कमेटी बनाई जाए और उसकी देखरेख में नीट-यूजी 2026 परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने का निर्देश दिया जाए।
कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए?
यह विवाद पहली बार कोर्ट नहीं पहुंचा है, बल्कि इससे पहले भी यह मामला अदालत के सामने आ चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाया कि पहले भी कोर्ट के आदेश पर एक विशेष निगरानी कमेटी का गठन किया गया था, जिसने परीक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए कई अहम सिफारिशें दी थीं और उन्हें स्वीकार भी किया गया था। अब अदालत की बेंच ने एनटीए को यह साफ-साफ बताने को कहा है कि उसने उस निगरानी कमेटी द्वारा सुझाए गए सुधारों और सिफारिशों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए हैं।


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