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3 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:

भोपाल।
अभिनेत्री और मॉडल त्विषा शर्मा को खुदकुशी के लिए उकसाने और प्रताड़ना के हाई-प्रोफाइल मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) शोभना मडावी की अदालत ने इस मामले में आरोपी पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके अधिवक्ता पुत्र समर्थ सिंह को दो सप्ताह के लिए न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।
यह पूरा मामला भोपाल के कटारा हिल्स पुलिस थाना इलाके से जुड़ा है, जहाँ त्विषा शर्मा की मौत के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंप दी थी। सीबीआई की विशेष टीम की मौजूदगी के बीच कोर्ट ने मां-बेटे को जेल भेजने का फैसला सुनाया।

जेल की सामान्य बैरक में नहीं, अलग जगह रखे जाएंगे:

दोनों अदालत में सुनवाई के दौरान पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की तरफ से पैरवी कर रहे वकीलों ने सुरक्षा का एक बड़ा मुद्दा उठाया। उनके वकीलों ने दलील दी कि गिरिबाला सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े मामलों में फैसले सुनाए हैं, जिसकी वजह से उनके कई दोषी और विचाराधीन बंदी इस समय भोपाल की केंद्रीय जेल में बंद हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है।
अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जेल प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दोनों को सामान्य बंदियों के साथ न रखकर अलग बैरक में रखा जाए। जेल विभाग के सूत्रों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच अलग स्थान पर शिफ्ट कर दिया गया है। वर्तमान में पूर्व न्यायाधीश को महिला वार्ड के ‘अ’ खंड में और उनके बेटे समर्थ को पुरुष वार्ड की ‘नई आमद बैरक’ में जगह दी गई है।

सीबीआई ने फिलहाल नहीं मांगी रिमांड, बाद में करेगी पूछताछ:
इस पूरी अदालती कार्यवाही के दौरान एक चौंकाने वाली बात यह रही कि सीबीआई की तरफ से आरोपियों की रिमांड के लिए कोई आवेदन पेश नहीं किया गया। कोर्ट में सीबीआई ने साफ कहा कि वे भविष्य में पूछताछ की जरूरत पड़ने पर रिमांड के लिए अलग से आवेदन लगाएंगे।
वहीं दूसरी तरफ, आरोपियों के वकीलों ने कोर्ट परिसर के भीतर मीडिया की भारी मौजूदगी और बदइंतजामी को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुनवाई के दौरान कुछ बाहरी लोग कक्ष में मौजूद थे, जिस पर बचाव पक्ष ने आपत्ति जताते हुए सीसीटीवी फुटेज निकालकर जांच करने की मांग की है।

अब नाम से नहीं, कैदी नंबर से होगी पहचान:
जेल प्रशासन की नियमावली के अनुसार, जेल की चारदीवारी के भीतर जाते ही अब इन हाई-प्रोफाइल कैदियों की पहचान बदल गई है। मेडिकल टेस्ट और स्वास्थ्य परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को कैदी नंबर आवंटित कर दिए गए हैं।
अब पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को जेल में विचाराधीन कैदी नंबर 71 के नाम से जाना जाएगा। वहीं, उनके बेटे समर्थ सिंह को जेल रिकॉर्ड में कैदी नंबर 1782 का नंबर दिया गया है। दोनों को दो सप्ताह तक इसी न्यायिक अभिरक्षा में रहना होगा।


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