18 अप्रैल 2026:
मध्य प्रदेश /भोपाल:
टीईटी मध्य प्रदेश के शिक्षक उतरे सड़कों पर:
मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को लेकर हो रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है।  राजधानी भोपाल में आज प्रदेश भर से आए शिक्षकों ने बड़ा प्रदर्शन किया।  भेल स्थित दशहरा मैदान में हजारों शिक्षक जुटे और मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा के तहत अपनी मांगों को लेकर  एकत्रित हुए । इस प्रदर्शन में करीब 50 हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए । जो अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर करने किया गया था।  इससे पहले भी यह आंदोलन जिला और ब्लॉक स्तर पर हो चुके हैं लेकिन अब मामला राज्य स्तर तक पहुंच चुका है।
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी जरूरी योग्यता पूरी की थी।   ऐसे में इतने वर्षों की सेवा करने के बाद TET  जैसी परीक्षा को अनिवार्य करना न्यायोचित नहीं है । कई शिक्षक 20 से 25 साल से पढ़ा रहे हैं उन पर नई शर्तें थोपना अनुचित है । शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि पहले से ही सेवा अवधि की गणना सही तरीके से नहीं की जा रही ,इससे उनके वेतन ,पेंशन और ग्रेच्युटी पर असर पड़ रहा है । अब TET  की अनिवार्यता ने उनकी नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा  दी है।

इधर मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन जारी कर दी है । जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि सरकार इस मुद्दे को कानूनी स्तर पर सुलझाने की कोशिश में है। इधर शिक्षक सड़कों पर उतरकर दबाव बना रहे हैं दूसरी तरफ सरकार अदालत के जरिए समाधान तलाश रही है ‌ शिक्षक संगठनों का कहना है कि रिव्यू पिटीशन अपनी जगह है लेकिन जब तक TET  का दबाव खत्म नहीं होता आंदोलन जारी रहेगा।

क्या है टीईटी यानि टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट:
आपको बता दें कि TET यानि टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट 2010 से लागू  की गई एक राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा है ,जिसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने अनिवार्य किया है । इसका उद्देश्य एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता  तय करना है।

मध्य प्रदेश सरकार में शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुनर्विचार याचिका दाखिल की है मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षकों को यह भरोसा दिलाया है कि सरकार उनके साथ है और उनके साथ अन्याय नहीं होने देगी।
शिक्षक संगठनों ने सरकार के इस कदम को लेकर आभार जताया है।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश जिसमें टीईटी की अनिवार्यता का उल्लेख है:
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक निर्णय पारित किया जिसमें सभी शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता जल्दी इस निर्णय के अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 1 से 5 वर्ष से अधिक बची हुई है, और इस पात्रता परीक्षा में पास नहीं है उन्हें परीक्षा में सम्मिलित करने के निर्देश दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्णय दिया यदि वह भविष्य में पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें यह पात्रता परीक्षा उपलब्ध करना आवश्यक होगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिक्षक कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री की आवास पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की और उन्हें इस आदेश से उत्पन्न हुई स्थितियों के बारे में भागवत कराया जिसमें मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी शिक्षकों को अवश्य शासन दिया कि सरकार यह निश्चित सुनिश्चित करेगी कि कोर्ट की प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय ना हो सरकार शिक्षकों के साथ है।इसी वजह से सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है।