1 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:
मध्य प्रदेश/भोपाल/ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स थाने से पुलिस की एक बहुत बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। अभिनेत्री और मॉडल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने पहले ही दिन गलत तरीके से एफआईआर दर्ज कर ली थी। जब पीड़ित मायके पक्ष ने इस गड़बड़ी को पकड़कर कोर्ट में आवेदन लगाया, तब जाकर पुलिस के अफसरों ने इसे तकनीकी खामी बताते हुए सुधारने का प्रयास किया। इस पूरे घटनाक्रम से पुलिस की साख पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं और पीड़िता का परिवार अब खुलकर सामने आ गया है।
क्या है पूरा मामला और पुलिस की चूक
त्विषा शर्मा की मौत 12 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी। इसके बाद 15 मई को भोपाल के कटारा हिल्स थाने में दहेज हत्या, दहेज प्रताड़ना और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। चूंकि मामला एक नवविवाहिता की मौत से जुड़ा था, इसलिए नियमानुसार इसकी जांच सहायक पुलिस आयुक्त मिसरोद संभाग रजनीश कश्यप कौल कर रहे थे। उन्होंने भोपाल एम्स की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे।
भारत में 1 जुलाई 2024 से नया कानून भारतीय न्याय संहिता यानी BNS लागू हो चुका है और अब सभी नए मामले इसी के तहत दर्ज होने चाहिए। इसके बावजूद, पुलिस ने दिव्या की FIR पुराने और बंद हो चुके कानून भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 154 के तहत दर्ज कर ली। जब त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा और भाई हर्षित शर्मा को इस बात का पता चला, तो उन्होंने कोर्ट को इस बड़ी चूक के बारे में बताया। इसके बाद पुलिस ने इसे महज एक तकनीकी गलती बताते हुए सुधारने का हवाला दिया।
बिजली गुल होने का अजीब बहाना
इस मामले में जब सवाल खड़े हुए तो सहायक पुलिस आयुक्त रजनीश कश्यप कौल ने एक अजीब दलील दी। उनका कहना है कि जिस दिन एफआईआर दर्ज की जा रही थी, उस दिन एफआईआर फ्रीज होने से कुछ देर पहले थाने की बिजली गुल हो गई थी। पुराने कानून में हुई एफआईआर को लेकर स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एससीआरबी से भी संपर्क किया गया था। सॉफ्टवेयर को रिफ्रेश करने के चक्कर में धाराएं बदल गईं। हालांकि, पुलिस के इस सॉफ्टवेयर रिफ्रेश करने से पहले ही पीड़ित परिवार को पुराने कानून वाली एफआईआर की कॉपी मिल चुकी थी। इस पूरी स्थिति से कोर्ट को भी अवगत करा दिया गया है।
जांच और सबूतों पर भी उठ रहे सवाल
कटारा हिल्स पुलिस की कार्यप्रणाली पहले दिन से ही संदेह के घेरे में है। घटना स्थल पर मौजूद अहम सबूतों जैसे कि फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए बेल्ट, पलंग और सास गिरिबाला सिंह के मोबाइल को जब्त करने में कई तरह की कमियां पाई गईं। पुलिस ने इन सबूतों को समय पर और सही तरीके से सुरक्षित नहीं किया। बाद में जब मायके पक्ष ने 33 रसूखदारों की सूची सार्वजनिक की, तब जाकर पुलिस ने गिरिबाला के फोन को जब्त किया जिससे विवाद और बढ़ गया। अब इस मामले में कॉल डिटेल निकालने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई गई है।
कटारा हिल्स थाने में पहले भी हुई है ऐसी लापरवाही:
यह पहली बार नहीं है जब कटारा हिल्स थाने में इतनी बड़ी लापरवाही हुई हो। करीब दो महीने पहले भी दो पक्षों के बीच एक विवाद हुआ था। उस समय पुलिस को प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करके दोनों गुटों को सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय भेजना था। इस मामले में बिना किसी गंभीर अपराध के एनसीआर की कार्रवाई की जानी थी, लेकिन पुलिस ने लापरवाही दिखाते हुए एनसीआर की जगह सीधे एफआईआर दर्ज कर दी थी। बाद में इस गलती को सुधारने और दर्ज मामले को निरस्त करने के लिए पत्राचार करना पड़ा था।
पूरे मध्य प्रदेश में सीसीटीएनएस के कारण परेशानी:
इस घटना ने मध्य प्रदेश में पुलिस के डिजिटल सिस्टम सीसीटीएनएस की कमियों को भी उजागर कर दिया है। प्रदेश में थानों की कुल संख्या 1215 है, जिसमें से 55 जिलों में 1180 मुख्य थाने हैं। बाकी बचे थाने ईओडब्ल्यू, जीआरपी, एसटीएफ और सीआईडी जैसे तकनीकी विंग से जुड़े हुए हैं। इन सभी थानों में मामले सीसीटीएनएस के तहत ही दर्ज होते हैं और इसकी प्रतिलिपि कोई भी पीड़ित कियोस्क सेंटर से ले सकता है।
संवेदनशील मामलों जैसे महिला उत्पीड़न या छेड़छाड़ की एफआईआर को सार्वजनिक नहीं किया जाता है, बल्कि सीधे सीसीटीएनएस सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाता है। इस पूरे सिस्टम की निगरानी और इसमें आने वाली तकनीकी कमियों को सुधारने का काम स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के पास होता है, लेकिन इस मामले में हुई चूक ने सिस्टम की तैयारियों पर सवालिया निशान लगा दिया है।


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