29 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्यप्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक भ्रष्टाचार के 25 साल पुराने एक मामले में हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई तय की है। इस कानूनी पेंच की वजह से दतिया में उपचुनाव की संभावना प्रबल हो गई है और आगामी राज्यसभा चुनावों का गणित भी दिलचस्प हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
राजेंद्र भारती दतिया से विधायक रहे हैं, लेकिन आर्थिक अनियमितता से जुड़े एक पुराने मामले में उन्हें तीन साल की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के आधार पर उनकी विधानसभा सदस्यता पहले ही समाप्त की जा चुकी है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी, लेकिन फिलहाल उन्हें वहां से राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। कोर्ट ने सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है, जिससे उनकी सदस्यता की बहाली की उम्मीदों को फिलहाल झटका लगा है।
दतिया में उपचुनाव के आसार
राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने के बाद दतिया विधानसभा सीट अब रिक्त (खाली) घोषित है। चूंकि उन्हें अब तक कोर्ट से स्टे या राहत नहीं मिली है, इसलिए चुनाव आयोग जल्द ही इस सीट पर उपचुनाव की घोषणा कर सकता है। दतिया मध्यप्रदेश की एक हाई-प्रोफाइल सीट रही है, ऐसे में यहां उपचुनाव होने से राज्य की राजनीति में हलचल तेज होना तय है।
राज्यसभा चुनाव का समीकरण
मध्यप्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं, जिन पर जून में चुनाव होने हैं। दिग्विजय सिंह, सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। विधानसभा के वर्तमान गणित को देखें तो:
कुल सदस्य संख्या: 230
भाजपा के पास: 164 विधायक
कांग्रेस के पास: 64 विधायक
भारत आदिवासी पार्टी: 1 विधायक
रिक्त सीट: 1 (राजेंद्र भारती की सीट)
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की प्राथमिकता की आवश्यकता होती है। इस गणित के हिसाब से भाजपा के पास दो सीटें आसानी से जीतने की ताकत है, जबकि तीसरी सीट के लिए कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।
कांग्रेस के लिए बढ़ती चुनौतियां
कांग्रेस के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एक तरफ राजेंद्र भारती की सदस्यता जाने से उनके वोटों की संख्या कम हुई है, वहीं विजयपुर और बीना के दो कांग्रेसी विधायकों (रामनिवास रावत और निर्मला सप्रे) के पाला बदलने या निष्पक्षता को लेकर भी संशय बना हुआ है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस संबंध में याचिका भी दायर की है। यदि क्रॉस वोटिंग या दलबदल की स्थिति बनती है, तो कांग्रेस के लिए अपनी एक राज्यसभा सीट बचाना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
वर्तमान में प्रदेश की नजरें अब 29 जुलाई को होने वाली कोर्ट की सुनवाई और उससे पहले घोषित होने वाले राज्यसभा चुनाव के शेड्यूल पर टिकी हैं। भाजपा जहां अपनी तीसरी सीट के लिए रणनीतियां बना रही है, वहीं कांग्रेस अपने कुनबे को एकजुट रखने की कोशिशों में जुटी है।
क्या कांग्रेस अपनी सीट सुरक्षित रख पाएगी या दतिया उपचुनाव से पहले कोई नया राजनीतिक मोड़ आएगा? यह आने वाले कुछ हफ्तों में साफ हो जाएगा।


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