29 अप्रैल 2026
भोपाल:

उत्तराखंड और गुजरात के बाद अब मध्यप्रदेश सरकार ने भी राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में अपने कदम तेज कर दिए हैं। प्रदेश सरकार ने इसके लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो कानून का ड्राफ्ट (प्रारूप) तैयार करने का काम शुरू करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मानना है कि यह राज्य में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला होगा।

रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में बनी समिति
प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रसाद देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है। यह समिति एक सप्ताह के भीतर अपना काम शुरू कर देगी। विधि एवं विधायी विभाग ने अन्य राज्यों (जैसे उत्तराखंड और गुजरात) में लागू किए गए कानूनों और उनकी तैयारियों की पूरी जानकारी मंगवा ली है ताकि मध्यप्रदेश के लिए एक सटीक ड्राफ्ट तैयार किया जा सके।

आम जनता और विशेषज्ञों से ली जाएगी राय
यूसीसी का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी जाएगी। इसके लिए:
* सरकार ‘जनसुनवाई’ का आयोजन करेगी।
* आम नागरिक, कानूनी विशेषज्ञ और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
* समिति सभी प्रभावित पक्षों से बातचीत करने के बाद 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

आदिवासी और दलित समुदायों के अधिकारों पर चर्चा
मध्यप्रदेश में आदिवासियों की बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि उनकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, रीति-रिवाजों और परंपराओं को सुरक्षित रखा जाएगा।
* संभावना है कि उत्तराखंड की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी आदिवासियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
* सरकार का कहना है कि आदिवासियों के हित में काम करने वाले संगठनों और व्यक्तियों से विशेष रूप से सुझाव लिए जाएंगे ताकि किसी पर भी जबरन कोई कानून न थोपा जाए।

विपक्ष ने उठाए सवाल
दूसरी ओर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस कदम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नई बहस खड़ी करने की कोशिश कर रही है। उनका मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकार उन दलितों और आदिवासियों को न्याय दिला पाएगी जिनकी अपनी अलग परंपराएं और सांस्कृतिक पहचान है? उन्होंने चिंता जताई कि कहीं यूसीसी के नाम पर आदिवासियों की परंपराओं को खत्म न कर दिया जाए।

अगर समिति अपनी रिपोर्ट तय समय सीमा में दे देती है, तो माना जा रहा है कि सरकार अगस्त-सितंबर में होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में ‘समान नागरिक संहिता विधेयक’ पेश कर सकती है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी नागरिकों के लिए एक समान सामाजिक कानून हो, जिसमें सबकी भावनाओं का सम्मान किया जाए।