3 मई 2026

नई दिल्ली:

पश्चिम बंगाल में मतगणना प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। कोर्ट ने मतगणना के दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका पर कोई भी आदेश देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जयमाला बागची की विशेष पीठ ने यह स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वह किन कर्मचारियों की नियुक्ति करेगा।

चुनाव आयोग के अधिकारों पर कोर्ट की मुहर
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार के सर्कुलर या आपत्तियां चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ नहीं जा सकतीं। अदालत ने साफ किया कि चुनाव आयोग के पास यह संवैधानिक अधिकार है कि वह पारदर्शी मतगणना सुनिश्चित करने के लिए किसी भी समूह या विभाग से कर्मचारियों को चुन सकता है। टीएमसी ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती से निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है, लेकिन कोर्ट ने इन आशंकाओं को आधारहीन माना।

पहले भी खारिज हुई थी याचिका
गौरतलब है कि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी टीएमसी के इस तर्क को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग का निर्देश अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है। टीएमसी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में किसी नए आदेश की जरूरत नहीं है और हाईकोर्ट का फैसला सही है।
क्यों हुआ था विवाद
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को संपन्न हुआ था। चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ केंद्रीय कर्मचारियों को भी तैनात करने का फैसला किया था। तृणमूल कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया था। चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील पीएस नरसिम्हा ने स्पष्ट किया कि 13 अप्रैल के सर्कुलर में पहले ही सारी बातें साफ कर दी गई थीं और आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है।
4 मई को होनी है मतगणना
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 4 मई को होने वाली मतों की गिनती का रास्ता साफ हो गया है। आयोग केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारियों की मिली-जुली निगरानी में मतगणना की प्रक्रिया पूरी करेगा। कोर्ट के इस रुख से राज्य सरकार और टीएमसी को बड़ा झटका लगा है, जो केंद्रीय कर्मियों की तैनाती का विरोध कर रहे थे।
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों के चयन में चुनाव आयोग की भूमिका सर्वोपरि है।