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18 June 2026

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि आगामी 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार यूसीसी (UCC) विधेयक पेश कर सकती है. सरकार की कोशिश है कि इसे इसी सत्र के दौरान पारित भी करा लिया जाए. अगर यह कानून प्रदेश में लागू होता है, तो उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद मध्यप्रदेश देश का चौथा ऐसा राज्य बन जाएगा जहां यूसीसी प्रभावी होगा.
मुख्यमंत्री ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि देश में एक समान कानून लागू करने की भावना में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने इसे ‘एक देश, एक कानून’ की राष्ट्रीय भावना से जोड़ते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा रही तो यह विधेयक इसी सत्र में पास होगा. उनका मानना है कि अलग-अलग धर्मों में विवाह और पारिवारिक कानूनों के अलग नियमों की अब आवश्यकता नहीं है और इससे समाज में समानता व न्याय का भाव मजबूत होगा.

22 जून तक सुझाव लेने की प्रक्रिया, जिलों में जनसुनवाई पूरी
यूसीसी का ड्रॉफ्ट तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति जनता और विभिन्न वर्गों से लगातार सुझाव ले रही है. प्रदेश के अधिकांश जिलों में जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. भोपाल में 22 जून को प्रशासन अकादमी के सभागार में एक बड़ी जनसुनवाई होने जा रही है, जहां प्राप्त सुझावों को संकलित किया जाएगा.
जनता से सुझाव लेने की यह पूरी प्रक्रिया 22 जून तक चलेगी. लोग आधिकारिक वेबसाइट (ucc.mp.gov.in) पर जाकर भी अपने विचार साझा कर सकते हैं. समिति के सूत्रों के मुताबिक, अब तक जितने भी सुझाव मिले हैं, उनमें से अधिकतर लोग इस कानून को लागू करने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं. सभी मंत्रियों से भी कहा गया है कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में जागरूकता अभियान चलाएं ताकि अधिक से अधिक लोग इस मंथन में भाग ले सकें.

क्या कर रही है यूसीसी समिति?
यह समिति मुख्य रूप से राज्य में प्रचलित व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक रीति-रिवाजों का अध्ययन कर रही है. इसके अध्ययन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  • विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), उत्तराधिकार, गोद लेने और लिंग-समानता जैसे विषयों का गहराई से अध्ययन करना.
  • राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवेश को ध्यान में रखकर एक संतुलित नागरिक संहिता का ढांचा तैयार करना.
  • लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले संबंधों का विनियमन करना और उनसे उत्पन्न संतानों के अधिकारों को सुरक्षित करना.
  • महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण व सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधान तय करना.

लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों को लेकर विरोध के सुर
इस प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर शामिल किए जा रहे कड़े प्रावधानों पर विरोध भी शुरू हो गया है. भोपाल मध्य सीट से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि समान कानून तभी सही होता है जब वह सबके हित में हो, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए लाया जा रहा ऐसा कानून समाज को बांटने का काम करता है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े ये नए प्रावधान व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ठेस पहुंचाते हैं और वे इस कानून का पूरी तरह विरोध करेंगे.


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