18 June 2026
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता UCC लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है. राज्य सरकार आगामी मानसून सत्र में यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर लिया है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि UCC को भी विधान सभा के इसी सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विश्वास जताया कि बाबा महाकाल की कृपा से यूसीसी विधेयक इसी सत्र में पारित होगा. दरअसल मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार समान नागरिक संहिता को लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है । इसके लिए प्रदेशवासियों से सुझाव मांगे गए हैं. राज्य सरकार की कोशिश यही है कि यूसीसी में आम जनता के सुझावों को भी अहमियत दिया जाए और यह कानून जनता की भागीदारी से ही बने.
मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा का सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा. इसकी अधिसूचना विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी कर दी गई है. बताया गया है कि पांच दिनों के इस सत्र में कई अहम शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे.
प्रस्तावित कानून का मुख्य फोकस विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप पर रहेगा. ड्राफ्ट के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी ढांचे में लाने की तैयारी है. ऐसे संबंधों में रहने वाली महिलाओं को अलगाव की स्थिति में भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा.सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को माता-पिता की संपत्ति में कानूनी वारिस का अधिकार दिया जाएगा. इसके लिए लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन या घोषणा अनिवार्य की जा सकती है.सरकार का दावा है कि नया कानून सभी धर्मों के लिए समान नियम लागू करेगा. वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिव-इन संबंधों और आदिवासी समुदाय को कानून से बाहर रखने पर सवाल उठाए है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि यूसीसी विधेयक इसी मानसून सत्र में पेश और पारित किया जा सकता है.


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