25 अप्रैल 2026

सागर:
मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की स्कूली शिक्षा को प्राइवेट स्कूलों से भी बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले के नरयावली में नवनिर्मित सांदीपनि विद्यालय का लोकार्पण करते हुए एक बड़ी सौगात दी है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार का लक्ष्य विद्यार्थियों को ऐसा माहौल और शिक्षा देना है, जिससे वे अपना भविष्य उज्जवल बना सकें।

प्राइवेट स्कूलों को पीछे छोड़ेंगे ये सरकारी स्कूल
मुख्यमंत्री ने बताया कि सागर जिले की 11 तहसीलों में कुल 425 करोड़ रुपये की लागत से सांदीपनि विद्यालय बनाए जा रहे हैं। ये स्कूल किसी भी बड़े महानगर के आधुनिक स्कूलों की तरह होंगे। इन विद्यालयों की खासियतें कुछ इस प्रकार हैं:
शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर: स्कूलों में बड़े खेल मैदान (प्लेग्राउंड), अत्याधुनिक लैब और डिजिटल क्लासरूम की सुविधा होगी।
बेटियों को प्राथमिकता: सागर शहर में 40 करोड़ की लागत से ‘महारानी लक्ष्मीबाई सांदीपनि विद्यालय’ तैयार हो चुका है। यह विशेष रूप से बालिकाओं के लिए है, जहाँ नए सत्र से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी।
बड़ी क्षमता: तीन मंजिला इस बिल्डिंग में 156 कमरे हैं। यहाँ प्ले स्कूल से लेकर 12वीं तक की शिक्षा दी जाएगी।

गरीब बच्चों को मिलेगी विश्वस्तरीय शिक्षा
इन स्कूलों का मुख्य उद्देश्य गरीब से गरीब परिवार के बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराना है। नरयावली में बना विद्यालय 27 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये विद्यालय केवल ईमारतें नहीं, बल्कि ज्ञान के मंदिर हैं जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य संवारेंगे।

एडमिशन के नियम और प्रक्रिया
इन स्कूलों में प्रवेश के लिए कुछ खास नियम तय किए गए हैं:
यहाँ मुख्य रूप से उन बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा जो स्कूल के 2 किलोमीटर के दायरे में आते हैं।
आसपास के छोटे सरकारी स्कूलों को इनमें मर्ज किया जाएगा।
यदि सीटें खाली रहती हैं, तो दूसरे बच्चों को भी मौका मिलेगा। नर्सरी में एडमिशन के लिए आंगनवाड़ी की सूची का आधार लिया जाएगा।

सागर जिले में कहाँ-कहाँ बन रहे हैं ये स्कूल?
सागर जिले की 11 तहसीलों— सागर, बंदा, नरयावली, देवरी, जैसीनगर, राहतगढ़, गढ़ाकोटा, केसली, बीना, बंडा और शाहगढ़ में ये स्कूल बनाए जा रहे हैं। कई जगहों पर पढ़ाई शुरू हो चुकी है और बाकी जगहों पर काम अंतिम चरण में है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन स्कूलों से पढ़कर निकलने वाले बच्चे न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।