16 अप्रैल 2026

इंदौर:
मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। बुधवार को हुई बहस के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण तर्क पेश किए। याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से वकील मनीष गुप्ता ने पक्ष रखते हुए कहा कि इस्लामिक कानून के मुताबिक भी किसी की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करके मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता।

इस्लामिक कानून का दिया हवाला
अदालत में दलील देते हुए कहा गया कि हदीस के अनुसार, अगर किसी जमीन को छीनकर वहां मस्जिद बनाई गई है, तो उस जमीन को उसके असली मालिक को लौटा देना चाहिए, यही इस्लाम की सीख है। साथ ही हिंदू कानून का जिक्र करते हुए कहा गया कि ‘एक बार मंदिर, हमेशा मंदिर’ होता है, इसलिए भोजशाला का स्थान सदैव मंदिर ही माना जाना चाहिए।

ब्रिटिश संग्रहालय की मूर्ति और राजा भोज का उल्लेख
सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि लंदन के ब्रिटिश संग्रहालय में वाग्देवी (माता सरस्वती) की जो मूर्ति रखी है, उस पर स्पष्ट लिखा है कि इसे राजा भोज ने ही स्थापित किया था। इसके अलावा 1908 में प्रकाशित एक राजपत्र (गजट) का भी हवाला दिया गया, जिसमें दर्ज है कि भोजशाला के पत्थरों पर राजा भोज द्वारा लिखे गए नाटकों का मंचन किया जाता था।

राजा भोज की किताब का मिला प्रमाण
अदालत में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने दलील दी कि भोजशाला का निर्माण परमार वंश के राजा भोज ने स्वयं करवाया था। उन्होंने बताया कि इस इमारत का ढांचा राजा भोज द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक ‘समरांगणसूत्रधार’ में बताए गए वास्तुशास्त्र के नियमों पर आधारित है। यह किताब प्राचीन भारतीय वास्तुकला और इंजीनियरिंग का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ मानी जाती है।

सन 1304 की ‘मेरुतुंग’ की किताब का भी उल्लेख किया गया, जो भोजशाला के प्राचीन स्वरूप की पुष्टि करती है।

ASI सर्वे के सबूतों पर जोर
याचिकाकर्ताओं ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पुराने और हालिया सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि वहां से देवी-देवताओं की मूर्तियां, आकृतियां और चित्र मिले हैं। उन्होंने तर्क दिया कि:
1. ये तमाम चीजें किसी मस्जिद में नहीं हो सकतीं, क्योंकि वहां इनकी अनुमति नहीं होती।
2. वहां मौजूद हवन कुंड की लंबाई-चौड़ाई और अन्य संरचनाएं यह सिद्ध करती हैं कि यह मूल रूप से मंदिर ही है।
3. भोजशाला के सर्वे में अब तक 150 से ज्यादा मूर्तियां मिल चुकी हैं, जो इस बात का ठोस प्रमाण हैं।

कोर्ट को बताया गया कि भोजशाला की बनावट परमारकालीन मंदिरों की शैली से हुबहू मेल खाती है, जो इसके मंदिर होने का एक बड़ा संकेत है।

24 घंटे पूजा का अधिकार मिले
याचिकाकर्ताओं की मांग है कि चूंकि सारे साक्ष्य भोजशाला के मंदिर होने की पुष्टि करते हैं, इसलिए हिंदुओं को वहां 24 घंटे पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए। फिलहाल हाई कोर्ट में सुनवाई जारी है और गुरुवार को भी अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस और सबूत पेश किए जाएंगे।
भोजशाला विवाद को लेकर हाई कोर्ट में कुल चार याचिकाएं और एक अपील एक साथ सुनी जा रही हैं, जिन पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

धार की इस ऐतिहासिक धरोहर के धार्मिक स्वरूप को लेकर चल रही यह कानूनी लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। मामले की अगली सुनवाई में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।