16 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य ठिकानों पर नजर रखने के लिए चीन के जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल किया है। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।
चीन निर्मित सैटेलाइट से हुई जासूसी
रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान (ईरान) ने चीन द्वारा बनाए गए एक विशेष सैटेलाइट ‘टीईई-01बी’ (TE-01B) के जरिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी हासिल की है। इस सैटेलाइट की मदद से ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों की निगरानी की और उन्हें निशाना बनाने की अपनी क्षमता में भारी इजाफा किया। बताया जा रहा है कि यह सैटेलाइट गुप्त तरीके से सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में बेहद सक्षम है।
लीक हुए ईरानी सैन्य दस्तावेजों के हवाले से यह दावा किया गया है कि इस सैटेलाइट के जरिए ईरान ने कई अहम जगहों की निगरानी की:
सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस समेत कई प्रमुख सैन्य ठिकाने।
मार्च में एक सऊदी एक्सप्रेस एयरबेस पर अमेरिकी विमानों पर हुए हमले की योजना में भी इसका हाथ बताया जा रहा है।
इजरायल और अमेरिका के साझा सैन्य ठिकानों की तस्वीरें और डेटा भी इसके जरिए जुटाया गया।
चीन ने रिपोर्ट को बताया झूठ
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चीन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इसे ‘असत्य और आधारहीन’ करार दिया है। चीन का कहना है कि वे किसी भी देश को युद्ध में ऐसी मदद मुहैया नहीं करा रहे हैं। चीन ने चेतावनी भी दी है कि अगर झूठी रिपोर्टों के आधार पर उन पर प्रतिबंध लगाए गए, तो वे इसका कड़ा जवाब देंगे।
ट्रंप का बयान: जल्द खत्म हो सकता है युद्ध
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सकारात्मक संकेत दिया है। उन्होंने कहा है कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष और युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि वे सत्ता में आने के बाद इस क्षेत्र में शांति और संघर्ष विराम की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को अब युद्धों से आगे बढ़कर विकास की ओर देखना चाहिए।
भले ही चीन इन दावों को नकार रहा है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इस बात की गंभीरता से जांच कर रही हैं कि क्या ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को ‘एपोसेट’ (Apstar) जैसी चीनी कंपनियों से सैटेलाइट डेटा मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सच साबित होता है, तो यह अमेरिका और चीन के रिश्तों में और भी कड़वाहट पैदा कर सकता है।
फिलहाल, इस खुलासे के बाद पश्चिम एशिया में सैन्य सुरक्षा को लेकर नए सिरे से रणनीति बनाई जा रही है।


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