2 मई 2026
नई दिल्ली:
मई का महीना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाला है। सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि कर दी है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय रसोई और बाजारों पर भी दिखने लगा है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सीधा बोझ पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में बाहर खाना और भी महंगा हो सकता है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कमर्शियल सिलेंडर की कीमत
सरकारी कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में एकमुश्त 993 रुपये का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में अब एक सिलेंडर 3,071.50 रुपये का हो गया है। भोपाल की बात करें तो यहाँ व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत अब 3074.50 रुपये तक पहुंच गई है। यह लगातार तीसरी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है, जिससे पिछले तीन महीनों में कुल 1303 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि हो चुकी है।
‘छोटू’ सिलेंडर भी नहीं बचा महंगाई से
सिर्फ बड़े सिलेंडर ही नहीं, बल्कि गरीब परिवारों, मजदूरों और छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 5 किलोग्राम के ‘छोटू’ सिलेंडर की कीमत भी 261 रुपये बढ़ा दी गई है। इस वृद्धि ने उन लोगों की चिंता बढ़ा दी है जो अपना गुजारा छोटे सिलेंडरों के जरिए करते हैं।
भोजन की थाली पर पड़ेगा असर
कीमतों में हुई इस भारी वृद्धि का असर सीधे तौर पर आम जनता पर पड़ेगा:
कमर्शियल गैस महंगी होने से अब रेस्टोरेंट संचालकों के लिए भोजन की लागत बढ़ जाएगी।
लागत बढ़ने के कारण जल्द ही ढाबों और रेस्टोरेंट्स में खाने की थाली और नाश्ते की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
हालांकि घरेलू एलपीजी (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बाहर का खाना महंगा होना मध्यम वर्ग के बजट को बिगाड़ देगा।
पेट्रोल-डीजल और एटीएफ की स्थिति
राहत की बात यह है कि घरेलू विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निकट भविष्य में पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ सकते हैं।
कंपनियों का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विनिमय दर में हो रहे बदलाव के कारण कीमतों को बढ़ाना मजबूरी है। अब देखना यह होगा कि महंगाई की यह मार आम आदमी के बजट को कितना प्रभावित करती है।


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