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9 जुलाई 2026:
मध्य प्रदेश /भोपाल:

सरदार सरोवर परियोजना में बड़ा समझौता हुआ है लेकिन जश्न से ज्यादा विवाद हो रहा है। सरकार कह रही है हजारों करोड़ बच गए, विपक्ष कह रहा है प्रदेश का हक छिन गया! आखिर सच क्या है!

सरदार सरोवर परियोजना को लेकर हुए नए समझौते के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक तरफ राज्य सरकार इसे प्रदेश के लिए बड़ा फायदा बता रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे मध्य प्रदेश के साथ अन्याय बता रही है।‌
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि इस समझौते से प्रदेश के हजारों करोड़ रुपये बच गए हैं। उनके मुताबिक, पहले कानूनी राय के आधार पर मध्य प्रदेश को गुजरात को करीब 1,500 करोड़ रुपये देने पड़ सकते थे। लेकिन चार राज्यों की बैठक में नई सहमति बनने के बाद अब मध्य प्रदेश को सिर्फ 231.80 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस समझौते में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत से घटाकर 16.17 प्रतिशत कर दी गई है। वहीं गुजरात की हिस्सेदारी बढ़ाकर पचहत्तर प्रतिशत कर दी गई है। इस बदलाव के बाद गुजरात को सभी राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये मिलेंगे ।

प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का कहना:
जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि इस परियोजना से मध्य प्रदेश को लगातार पचासी पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है और 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिल रहा है।
इस परियोजना से कुल उत्पादित बिजली का 57% हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलता है। और इंदौर उज्जैन जबलपुर देवास धार और कटनी जैसे बड़े शहरों को पेयजल सप्लाई होती है
सरदार सरोवर प्रोजेक्ट मामले में प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का कहना है कि इस समझौते से मध्य प्रदेश को करीब 1200 करोड़ से अधिक की बचत हुई है और यह समझौता एक ऐतिहासिक फैसला है।

इस समझौते पर विपक्ष का आरोप:
उन्होंने विपक्ष से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील की……वहीं कांग्रेस ने इस समझौते पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरदार सरोवर परियोजना में सबसे ज्यादा जमीन मध्य प्रदेश की डूबी, हजारों लोग विस्थापित हुए और अब प्रदेश को ही गुजरात को पैसा देना पड़ रहा है…… उन्होंने सवाल उठाया कि जब मध्य प्रदेश पहले हजारों करोड़ रुपये का दावा कर रहा था, तो फिर इतनी बड़ी राशि छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया…..पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने गुजरात और केंद्र सरकार के दबाव में प्रदेश के हितों से समझौता किया है……. वहीं कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने इस पूरे समझौते पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है….. उनका कहना है कि सरकार को सभी शर्तें और तथ्य जनता के सामने रखने चाहिए।‌ अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समझौता वास्तव में मध्य प्रदेश के लिए फायदे का सौदा है, या फिर विपक्ष के आरोपों की तरह प्रदेश ने अपने अधिकारों से समझौता किया है।

क्या यह समझौता मध्य प्रदेश के हित में है या सरकार को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।


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