24 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश /भोपाल/
सुरों की इस महफिल में 50 के दशक की धुनें, 60 साल पुराने गीत सुन श्रोता हुए उत्साहित
भोपाल के रवीन्द्र भवन में सदाबहार नगमों की प्रस्तुति के साथ हिंदी सिनेमा के गायकों को उनके ही गीतों से श्रद्धाजलि दी गई। इस दौरान 50, 60 और 70 के दशक की धुनें गूंजीं, तो हर उम्र के श्रोता पुरानी यादों में खो गए। अंजनि सभागार में रविवार शाम कार्यक्रम की शुरुआत हुई। संगीतकार केदार सिंह चौहान ने लाइव म्यूजकि अरेंजमेंट दिया। गीतकार अली शाहिद ने तू ही मेरी शब, सुबह है… छेड़ा। तलत हसन का ‘कभी तन्हाइयों में भी’, फरहत खान का ‘ऐ दिल मुझे बता दे’, मलय श्रीवास्तव का ‘रिमझिम् गिरे सावन’ और डॉ. रोहित का ‘मेरे दिल ने तड़प के’ सीधा दिल में उतर गया। यहां कीर्ति सूद, डॉ. मणि सक्सेना, सैयदमजहर अली, राजेश भट्ट और नुशूर अहमद की कव्वाली ‘पर्दा है पर्दा है ‘ने
दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
20 गायकों ने एक सुर में पुकारा:
बीस गायकों ने एक सुर में जब लता मंगेशकर का गीत… रहें न रहें हम, महका करेंगे… गाया तो सभागार में बैठे श्रोता भावुक हो गए। गिटार पर संजीव झा, ढोलक पर प्रकाश केमे, तबले पर शाहनवाज हुसैन, ऑक्टोपैड पर विशाल जोशी, ताल वाद्यों पर राजकुमार सक्सेना और बेस गिटार पर दुष्यंत सचदेवा की जुगलबंदी रही।


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