29 अगस्त 2025: महाराष्ट्र की राजनीति में आये दिन उठापटक चल रही होती है…अब महाराष्ट्र की सड़कों पर मराठा आरक्षण का नया तूफ़ान उठा है…मुंबई के आज़ाद मैदान में ऐतिहासिक प्रदर्शन हो रहे हैं..…अभी कल ही मप्र में 27 फीसदी ओबीसी आऱक्षण को लेकर कई दिनों से लंबित मामले पर दोनों दलों की सहमति बनी है….तो क्या ये दोनों आरक्षण से जुड़े मामले अब देश की राजनीति की दिशा बदलने जा रहे हैं……आखिर किसको होगा फायदा…और किसकी चमकेगी राजनीति
मराठा आरक्षण आंदोलन का नया मोर्चा खुला:
मराठा आरक्षण आंदोलन के बड़े चेहरे मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण को लेकर मोर्चा खोल रखा है…. वे पहली बार मुंबई पहुंचे… तो उनके साथ एक बड़ा उनका बड़ा काफ़िला शामिल हो गया…वाशी टोला से होते हुए मनोज का काफिला आज़ाद मैदान पहुंचा….हजारों गाड़ियों के काफ़िले और समर्थकों के नारों ने पूरे माहौल को गरमा दिया…
नारे गूंजते रहे -हमें मराठा आरक्षण दो, या हमें गोली मार दो…आज़ाद मैदान में जरांगे अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे हैं…वो पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि 29 अगस्त से अनिश्चितकालीन अनशन करेंगे…उनकी मुख्य मांग है कि मराठा समाज को OBC श्रेणी में कुनबी के तौर पर मान्यता मिले और 10 परसेंट आरक्षण दिया जाए…जरांगे का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और गणेशोत्सव में कोई बाधा नहीं डाली जाएगी…
वंही अगर महाराष्ट्र के पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश की बात करें तो इसी बीच मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम घटा…दरअसल, सीएम डॉ. मोहन यादव ने सर्वदलीय बैठक बुलाई…जिसमें भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों ने मिलकर संकल्प लिया कि 27% ओबीसी आरक्षण लागू किया जाएगा….
मार्च 2019 में कमलनाथ सरकार ने 14 परसेंट से बढ़ाकर इसे 27 परसेंट कर दिया था…. फिर मार्च 2020 में हाईकोर्ट ने रोक लगाई और और कहा कि कुल आरक्षण 50 परसेंट से ज़्यादा नहीं हो सकता…अगस्त 2023 में हाईकोर्ट ने सतासी तेरह का फॉर्मूला लागू किया जिसमें 13 परसेंट पद होल्ड पर हैं…फिर 28 जनवरी साल 2025 जब हाईकोर्ट ने आरक्षण के पक्ष में फैसला दिया…और फरवरी 2025 मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा…जिसके चलते अब 23 सितंबर 2025 से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू होगी।
महाराष्ट्र में मराठा समाज और मध्य प्रदेश में ओबीसी दोनों ही आरक्षण की लड़ाई को निर्णायक मोड़ पर ले जा रहे हैं…महाराष्ट्र में जरांगे का आंदोलन सीधे-सीधे मराठा वोटबैंक से जुड़ा है…और दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पॉलिटिकल क्रेडिट लेने की कोशिश में हैं…लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या आरक्षण की ये जंग केवल समाज का हक़ दिलाएगी या फिर चुनावी हथियार बनकर समाज में दीमक बन कर खोखला करेगी…. क्योंकि महाराष्ट्र का आज़ाद मैदान और मध्य प्रदेश की सियासत… दोनों जगह आरक्षण की राजनीति उबाल पर है…अब देखना ये होगा कि आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट और सरकारें इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती हैं…..और आरक्षण का मुद्दा कब तक नेताओं की राजनीति चमकाता रहेगा…


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