29 अप्रैल 2026
नई दिल्ली:

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAG) के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग और बैंकों के साथ बड़ी धोखाधड़ी के मामले में कार्रवाई करते हुए ईडी ने ग्रुप की 3,034.90 करोड़ रुपये की नई संपत्तियों को कुर्क (जब्त) कर लिया है। इस ताज़ा कार्रवाई के बाद अनिल अंबानी समूह की अब तक कुर्क की गई कुल संपत्ति की कीमत बढ़कर 19,344 करोड़ रुपये हो गई है।
किन संपत्तियों पर गिरी गाज?
ईडी ने मुख्य रूप से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (आर-इंफ्रा) से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाया है। जब्त की गई संपत्तियों में कई आलीशान प्रॉपर्टी और शेयर शामिल हैं:
मुंबई में ‘उषा किरण’ भवन में स्थित एक प्राइम फ्लैट।
लोनावला (पुणे) के खंडाला में स्थित एक आलीशान फार्महाउस।
अहमदाबाद के साणंद इलाके में स्थित कीमती जमीन।
रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के 7.71 करोड़ शेयर, जो ‘राइज-ई ट्रस्ट’ (अनिल अंबानी फैमिली ट्रस्ट) के नाम पर थे।
क्यों हो रही है यह कार्रवाई?
यह पूरी जांच सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज की गई उन शिकायतों पर आधारित है, जो देश के बड़े बैंकों और संस्थानों ने की थी। इसमें मुख्य रूप से भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा और एलआईसी (LIC) शामिल हैं। इन संस्थाओं का आरोप है कि अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियों ने लोन के नाम पर ली गई भारी-भरकम राशि का दुरुपयोग किया और उसे गलत तरीके से ठिकाने लगाया (मनी लॉन्ड्रिंग)।

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
इसी मामले से जुड़ी एक और बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि ‘कॉर्पोरेट गारंटी’ से जुड़ी जो भी देनदारियां (उधारी) होती हैं, उन्हें दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) के तहत ‘वित्तीय ऋण’ (Financial Debt) की श्रेणी में ही रखा जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि बैंक अब अपनी उधारी वसूलने के लिए अधिक मजबूती से दावा कर सकेंगे।
अनिल अंबानी ग्रुप की बढ़ी मुश्किलें
ईडी की इस कार्रवाई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों की वित्तीय हालत को और अधिक संकट में डाल दिया है। जांच एजेंसी अब उन रास्तों का पता लगा रही है जिनके जरिए फंड को डायवर्ट किया गया था। आने वाले दिनों में ग्रुप की कुछ और संपत्तियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।