2 मई 2026
नई दिल्ली:
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार जोसेफ विजय थलापति ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ मैदान में उतरकर सत्ताधारी दल डीएमके (DMK) के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। हाल ही में विजय थलापति का तिरुचिरापल्ली चर्च में घुटनों के बल चलना चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे राजनीतिक गलियारों में एक बड़े ‘गेम चेंजर’ के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जिस तमिलनाडु में सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणियां की गई थीं, वहीं अब वोटों का समीकरण बदलता नजर आ रहा है। विजय थलापति ने हाल ही में चर्च में जिस तरह से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उसे ईसाई और दलित समुदाय को अपनी ओर खींचने की कोशिश माना जा रहा है। तमिलनाडु की करीब 200 विधानसभा सीटों पर डीएमके का दबदबा रहा है, लेकिन थलापति के इस कदम ने डीएमके के रणनीतिकारों को चिंता में डाल दिया है।
ईसाई और दलित वोट बैंक पर नजर
तमिलनाडु की राजनीति में ईसाई समुदाय और अनुसूचित जाति (SC) के वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं:
1. कन्याकुमारी, थूथुकुडी और तिरुनेलवेली जैसे जिलों में ईसाई समुदाय का काफी प्रभाव है।
2. राज्य में ईसाई समाज कुल जनसंख्या का करीब 6 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 20 प्रतिशत है।
3. परंपरागत रूप से ये दोनों ही वर्ग डीएमके और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के बीच बंटते रहे हैं, लेकिन अब थलापति विजय इनमें सेंध लगाते दिख रहे हैं।
डीएमके को सता रहा है किसका डर?
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर दिए गए बयानों के बाद हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बनी हुई है। ऐसे में डीएमके को डर है कि अगर ईसाई और दलित वोट बैंक थलापति विजय की पार्टी की ओर मुड़ गया, तो चुनाव परिणाम उनके खिलाफ जा सकते हैं।
2024 और 2026 की लड़ाई
दिलचस्प बात यह है कि साल 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने कन्याकुमारी सीट पर कड़ी टक्कर दी थी। अब 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए थलापति विजय का मैदान में उतरना लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि थलापति विजय की बढ़ती लोकप्रियता सीधे तौर पर डीएमके के वोट बैंक को नुकसान पहुँचा सकती है।
तमिलनाडु की जनता अब तक दो बड़े दलों (DMK और AIADMK) के बीच बंटी रही है, लेकिन एक ‘सुपरस्टार’ की राजनीति में एंट्री ने सत्ता के गलियारों में बेचैनी पैदा कर दी है। क्या थलापति विजय का यह ‘चर्च दांव’ उन्हें सत्ता की कुर्सी तक ले जाएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


Leave a Reply