27 जुलाई 2026 :मध्य प्रदेश:

भोपाल में ‘कजरी-झूला गायन महोत्सव’ का कल रविवार शाम समापन हो गया। भारत भवन के संगीत केंद्र ‘अनहद’ द्वारा संचालित ये कार्यक्रम था। इस आयोजित कार्यक्रम में रविवार को बघेलखंड और बुंदेलखंड की लोकपरंपराओं पर आधारित गीतों की प्रस्तुतियां दी गईं। पहले सत्र में अरविन्द कुमार और उनके साथियों ने बघेली लोकगायन की शुरुआत ‘माई सुरसतिया हो…’ से की। इसके बाद उन्होंने कजरी, हिंदुली, सुआ और झूला गीत प्रस्तुत किए। इन गीतों के माध्यम से सावन में विरह, प्रकृति संरक्षण, धान रोपाई और ग्रामीण जीवन की परंपराओं को दिखाया गया। कोरस में आकांक्षा गुप्ता, राधा और किरण सिंह ने साथ दिया, जबकि तबले पर रोहन वर्मा और ढोलक पर अमन साकेत रहे।

दूसरे संत्र में उर्मिला पाण्डेय और उनके साथी कलाकारों ने बुंदेली लोकधुनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने ‘हरे रामा भादौ रैन अंधियारी…’, ‘चरखारी के, सुघर सुनार…’, ‘सावन के भवीन झूला…’ और ‘गई भोरे राजा हिडोलना झूलन…’ जैसे वर्षा व श्रृंगार रस से भरपूर लोकगीत गाए। सहगायन में गायत्री द्विवेदी व अनामिका पाण्डेय ने साथ दिया। बांसुरी पर वीरेंद्र कोरे, तबले पर मधुरेंद्र आनंद ने संगत की।

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