जबलपुर/कटनी:
मध्य प्रदेश के कटनी जिले में स्थित ‘स्लीमनाबाद टनल परियोजना’ का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि जो काम कभी पूरी तरह असंभव सा प्रतीत हो रहा था, उसे हमारी टीम ने मुमकिन कर दिखाया है। यह टनल भारत की सबसे लंबी जल सुरंग (वॉटर टनल) है, जो मध्य प्रदेश के जल प्रबंधन और सिंचाई के क्षेत्र में एक नया स्वर्ण अध्याय लिखेगी।
लगातार 17 वर्षों के कड़े संघर्ष और निरंतर प्रयासों के बाद आखिरकार स्लीमनाबाद सुरंग का यह बड़ा सपना धरातल पर साकार हो गया है।

किसानों और कृषि क्षेत्र को इससे भारी लाभ मिलेगा
इस परियोजना की मदद से नर्मदा नदी का पानी विंध्य क्षेत्र के सूखे इलाकों तक आसानी से पहुँचाया जा सकेगा।
इस जल सुरंग के चालू होने से विंध्य क्षेत्र की कुल कई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित हो सकेगी, जिससे किसानों की फसल पैदावार में भारी बढ़ोतरी होगी।

इंजीनियरिंग का बेहतरीन नमूना:
मुख्यमंत्री ने इसे विज्ञान, आधुनिक इंजीनियरिंग और कुशल जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट और अनूठा उदाहरण बताया है।
मुख्यमंत्री ने खुद किया निरीक्षण, श्रमिकों और इंजीनियरों का बढ़ाया हौसला.
हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं कटनी जिले में पहुँचकर देश की इस सबसे लंबी जल सुरंग का बारीक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर काम कर रहे मजदूरों, इंजीनियरों, विषय-विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों से सीधा संवाद किया।
उन्होंने कहा
> “तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद हमारे इंजीनियरों और श्रमिकों ने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर इस असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। यह आगामी तीन महीनों में शुरू होने वाली दो प्रमुख नहरों के जरिए विंध्य क्षेत्र के किसानों के लिए समृद्धि के नए द्वार खोलेगी।”
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केंद्र सरकार से मिला ₹275 करोड़ का बड़ा सहयोग
इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने में केंद्र सरकार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में केंद्र सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए 275 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता राशि प्रदत्त की गई, जबकि बाकी का वित्तीय खर्च मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया गया है।
गंगा और नर्मदा का अनूठा भौगोलिक मिलन
यह जल सुरंग भौगोलिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सदियों से पश्चिम की ओर बहकर अरब सागर में समाहित होने वाली नर्मदा नदी के पानी को एक प्रतीकात्मक मोड़ देगी। इस टनल के माध्यम से अब नर्मदा का पवित्र जल सोन बेसिन तक पहुंचेगा और वहां से सोन नदी के जरिए ऐतिहासिक रूप से गंगा बेसिन तक का सफर तय करेगी l

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