7 मई 2926
नई दिल्ली:
भारतीय जनता पार्टी ने पिछले एक दशक में देश की राजनीति में अपनी पकड़ बहुत मजबूत कर ली है। अगर हम चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें, तो सितंबर 2013 में देशभर में भाजपा के कुल 773 विधायक थे, जो मई 2026 तक बढ़कर 1800 से भी ज्यादा हो गए हैं। यह बदलाव सिर्फ संख्या का नहीं है, बल्कि यह भाजपा की बेहतर रणनीति और संगठन के विस्तार का नतीजा है।
पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत में ऐतिहासिक बढ़त
भाजपा के लिए सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी पश्चिम बंगाल में देखने को मिली है। साल 2013 में बंगाल विधानसभा में भाजपा का एक भी विधायक नहीं था, लेकिन 2026 के चुनाव में पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 207 सीटें हासिल की हैं। इसी तरह केरल जैसे राज्य में, जहाँ पहले भाजपा का खाता भी नहीं खुलता था, अब वहां पार्टी के तीन विधायक हैं।
उत्तर-पूर्वी राज्यों (नॉर्थ-ईस्ट) में भी भाजपा ने अपनी ताकत दिखाई है। मणिपुर, मेघालय और मिजोरम जैसे राज्यों में जहाँ 2013 में भाजपा का कोई नामोनिशान नहीं था, अब वहां न सिर्फ भाजपा की मौजूदगी है बल्कि सीटों की संख्या में भी बड़ा उछाल आया है। तेलंगाना जैसे दक्षिणी राज्य में भी पार्टी धीरे-धीरे अपना आधार मजबूत कर रही है।
हिंदी पट्टी के राज्यों में बढ़ता प्रभाव
उत्तर प्रदेश और अन्य हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा का दबदबा और बढ़ा है। उत्तर प्रदेश में साल 2013 में भाजपा के पास केवल 47 विधायक थे, जो 2026 में बढ़कर 257 हो गए हैं। मध्य प्रदेश में भी विधायकों की संख्या 143 से बढ़कर 165 हो गई है। गुजरात और महाराष्ट्र में भी पार्टी ने अपनी स्थिति को और ज्यादा मजबूत किया है। महाराष्ट्र में भाजपा के विधायकों की संख्या 46 से बढ़कर 131 तक पहुंच गई है।
पूर्वोत्तर और अन्य राज्यों में विस्तार
पूर्वोत्तर के राज्यों में भाजपा का प्रदर्शन शानदार रहा है। अरुणाचल प्रदेश में विधायकों की संख्या 3 से बढ़कर 46 हो गई है, जबकि असम में यह संख्या 5 से बढ़कर 82 तक पहुंच गई है। इसके अलावा त्रिपुरा, नागालैंड और मणिपुर में भी पार्टी ने अपनी जड़ें जमा ली हैं। ओडिशा में भी भाजपा ने बड़ी छलांग लगाई है, जहाँ उसकी सीटें 6 से बढ़कर 79 हो गई हैं।
22 राज्यों में भाजपा और सहयोगियों की सरकार
फिलहाल देश के 22 राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों (एनडीए) की सरकारें हैं। यह आंकड़ा साबित करता है कि भाजपा अब केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक मजबूत राष्ट्रीय पार्टी बन चुकी है। पश्चिम बंगाल की जीत के बाद अब भाजपा के पास 17 राज्यों में अपने मुख्यमंत्री हैं, जबकि 5 राज्यों में वह गठबंधन सरकार का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा की इस सफलता के पीछे जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती, सटीक चुनावी रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व सबसे बड़ा कारण रहा है। पार्टी ने अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाला है, जिसका फायदा उसे चुनावों में मिल रहा है।


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