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3 अप्रैल 2026
भोपाल:
राजधानी भोपाल में ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए सरकार ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। अब जबलपुर, बैतूल और होशंगाबाद की ओर से आने वाले वाहनों को इंदौर जाने के लिए भोपाल शहर के अंदर घुसने की जरूरत नहीं होगी। इसके लिए 31 किलोमीटर लंबा एक नया ‘पश्चिमी बायपास’ (Western Bypass) बनाया जा रहा है, जिसे केंद्र सरकार और एमपी सड़क विकास निगम ने मंजूरी दे दी है।

क्यों बदला गया सड़क का रूट?
पहले इस बायपास का रूट अलग था, लेकिन पर्यावरण नियमों और रातापानी टाइगर रिजर्व के कारण इसमें बदलाव करना पड़ा।
पुराने रूट का कुछ हिस्सा टाइगर रिजर्व और घाटियों से होकर गुजर रहा था, जिससे वन्यजीवों को खतरा था और केंद्र से मंजूरी मिलना मुश्किल था।
अब यह बायपास मंडदीप के पास रतनपुर से शुरू होकर कोलार होते हुए फंदा चौराहे तक जाएगा। इस बदलाव से पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा और प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल गई है।

इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 3225 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अधिकारियों का दावा है कि इस बायपास के बनने के बाद मंडदीप से फंदा तक का सफर महज 20 मिनट में पूरा हो जाएगा। फिलहाल शहर के अंदर से जाने में घंटों लग जाते हैं।
यह एक फोरलेन हाईवे होगा, जिसे हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा।

शहर को क्या होगा फायदा?
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, वर्तमान में जबलपुर और बैतूल से इंदौर जाने वाले भारी वाहन भोपाल शहर के बीच से गुजरते हैं, जिससे हलालपुर, लालघाटी और बैरागढ़ जैसे इलाकों में भारी जाम लगता है।
भारी वाहनों के बाहर से निकलने पर शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव 40% तक कम हो जाएगा।
भारी वाहनों की आवाजाही शहर में कम होने से दुर्घटनाएं भी घटेंगी।
यह भोपाल का चौथा बायपास होगा, जो शहर के चारों ओर एक रिंग रोड जैसा जाल बिछाने में मदद करेगा।
इस प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का काम भी जल्द शुरू होगा। मेसर्स पीएनसी इन्फ्रा लिमिटेड के साथ अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है, जिससे इस साल के अंत तक काम में तेजी आने की उम्मीद है।


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