22 अगस्त 2026:
मध्य प्रदेश/ भोपाल:
मध्य प्रदेश में फार्मेसी की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए इस बार सीटों का दायरा कुछ सिमटता नजर आ रहा है। बीफार्मा और डीफार्मा को मिलाकर पिछले साल की तुलना में 8305 सीटें कम हो गई है। वहीं फार्मेसी कॉलेजों की संख्या में भी 125 की कमी आई है। पिछले साल दोनों पाठ्यक्रमों में 455 कॉलेजों की 33,100 सीटें थीं, जबकि इस साल फिलहाल 330 कॉलेजों में 24,795 सीटें ही उपलब्ध हैं। हालाकि संबद्धता और मान्यता की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह आंकड़ा बदल सकता है, लेकिन पहले राउंड तक छात्रों को इसी के आधार पर प्रवेश लेना होगा।
रजिस्ट्रेशन 29 में से शुरू होकर 16 सितंबर तक:
फार्मेसी पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया लगातार चार साल से लेट हो रही है। इस बार प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन 29 मई से शुरू होकर 16 सितंबर तक चलेगा। 17 सितंबर से दस्तावेज सत्यापन और 24 सितंबर को पहला सीट अलॉटमेंट होगा। पूरी काउंसलिंग प्रक्रिया 30 अक्टूबर तक चलेगी। पीसीआइ की मान्यता प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरजीपीवी कॉलेजों को संबद्धता देगा। इसके बाद ही पात्र कॉलेज काउंसलिंग में शामिल हो सकेंगे। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार अभी इन ऑकड़ों को अंतिम नहीं माना जा सकता है। जब तक पूरी प्रक्रिया नहीं हो जाती है, कुछ भी कहना जल्द बाजी होगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इस बार डीफार्मा में एक-तिहाई सीटें घटीं:
डीफार्मा में स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है। पिछले साल 237 कॉलेजों में 14,220 सीटें थीं। इस साल फिलहाल 159 कॉलेजों में 9495 सीटें ही हैं। यानी 78 कॉलेज और 4725 सीटें कम हुई हैं। डीफार्मा में सीटों की संख्या 33 प्रतिशत घट गई है।
सीटों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है:
अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं। कॉलेजों की संबद्धता और मान्यता की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ नए कॉलेज और सीटें जुड़ सकती हैं। ऐसे में काउंसलिंग शुरू होने तक फार्मेसी की कुल सीटों में बढ़ोतरी की संभावना है।
बीफार्मा में 3580 सीटें कम हो गई:
बीफार्मा में पिछले साल 218 कॉलेजों में 18,880 सीटें थीं। इस साल कॉलेजों की संख्या घटकर 171 और सीटें 15,300 रह गई हैं। यानी 47 कॉलेज और 3580 सीटें कम हुई हैं। सीटों में करीब 19 प्रतिशत की गिरावट आई है।


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